नई दिल्ली (ईएमएस)। ओरल हेल्थ का सीधा संबंध हमारे दिमाग और मानसिक स्थिति से भी होता है। यदि दांतों और मसूड़ों की सही देखभाल नहीं की जाती, तो इसका असर पूरे शरीर और खासतौर पर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब दांतों में सड़न, मसूड़ों में सूजन या किसी तरह का संक्रमण होता है, तो व्यक्ति को लगातार दर्द का सामना करना पड़ता है। यह दर्द न केवल खाने-पीने में परेशानी पैदा करता है, बल्कि नींद को भी प्रभावित करता है। पर्याप्त नींद न मिल पाने और लंबे समय तक दर्द बने रहने से व्यक्ति चिड़चिड़ा हो सकता है। इसके साथ ही तनाव और चिंता जैसी समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं, जो धीरे-धीरे मानसिक संतुलन को प्रभावित करती हैं। ओरल हेल्थ का असर आत्मविश्वास पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यदि दांत पीले, टूटे हुए हों या मुंह से बदबू आती हो, तो व्यक्ति दूसरों के सामने खुलकर बात करने से हिचकिचाने लगता है। कई लोग तो हंसने से भी बचते हैं। यह स्थिति सामाजिक व्यवहार को प्रभावित करती है और व्यक्ति के आत्मविश्वास में गिरावट आती है, जो आगे चलकर मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। इस समस्या का एक और महत्वपूर्ण पहलू बैक्टीरिया से जुड़ा है। जब मुंह की सफाई ठीक से नहीं होती, तो हानिकारक बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। ये बैक्टीरिया खून के जरिए शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंच सकते हैं, जिनमें दिमाग भी शामिल है। कुछ शोधों में यह संकेत मिला है कि खराब ओरल हेल्थ का संबंध याददाश्त कमजोर होने और अन्य संज्ञानात्मक समस्याओं से भी हो सकता है। सामाजिक जीवन पर भी इसका असर नजर आता है। मुंह की बदबू या दांतों की खराब स्थिति के कारण लोग सामाजिक कार्यक्रमों, बैठकों या दोस्तों के साथ समय बिताने से कतराने लगते हैं। इससे धीरे-धीरे अकेलापन बढ़ता है, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि इन समस्याओं से बचाव आसान है। नियमित रूप से दिन में दो बार ब्रश करना, खासकर रात में सोने से पहले, फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल करना, मीठी चीजों का सीमित सेवन और समय-समय पर दंत चिकित्सक से जांच करवाना जैसे छोटे कदम बड़े लाभ दे सकते हैं। सुदामा/ईएमएस 26 मार्च 2026