ज़रा हटके
26-Mar-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। मार्च और अप्रैल का महीना शरीर के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। इन दिनों में मौसम के बदलाव का समय होता है, जब सर्दी धीरे-धीरे खत्म होकर गर्मी की शुरुआत होती है। इस संक्रमण काल को वसंत ऋतु कहा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान शरीर में जमा कफ पिघलने लगता है, जिससे सर्दी-खांसी, सुस्ती, पाचन संबंधी समस्याएं और शरीर में भारीपन जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि खान-पान और दिनचर्या में बदलाव कर शरीर को संतुलित रखा जाए। आयुर्वेद के अनुसार, हेमंत और शिशिर ऋतु के दौरान शरीर में कफ का संचय होता है, जो वसंत के आते ही पिघलने लगता है। यही कारण है कि इस मौसम में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अगर इस समय सही दिनचर्या और संतुलित आहार अपनाया जाए, तो इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। सुबह जल्दी उठना और नियमित व्यायाम करना इस मौसम में बेहद फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इससे शरीर सक्रिय रहता है और कफ के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। खान-पान की बात करें तो इस मौसम में कफ को कम करने वाली चीजों को आहार में शामिल करना चाहिए। कड़वे और कसैले स्वाद वाले खाद्य पदार्थ शरीर के लिए लाभकारी माने जाते हैं। नीम के पत्ते, पुराना गेहूं, मूंग दाल और जौ जैसे अनाज इस दौरान विशेष रूप से फायदेमंद होते हैं। इसके अलावा, पानी को उबालकर पीने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इस मौसम में संक्रमण और मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। वहीं, कुछ चीजों से परहेज करना भी जरूरी होता है। मीठे, खट्टे और ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना चाहिए। घी और तेल से बनी भारी और मीठी चीजों से दूरी बनाना बेहतर रहता है, क्योंकि ये कफ को बढ़ा सकती हैं। वसंत ऋतु में दही खाने से भी बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह कफ को बढ़ाने का काम करता है। इसके स्थान पर छाछ का सेवन किया जा सकता है, जिसे काले नमक और जीरे के साथ लेना अधिक लाभकारी होता है। दिनचर्या में भी कुछ सावधानियां जरूरी हैं। खासतौर पर दिन में सोने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे शरीर में कफ की मात्रा बढ़ती है और आलस्य महसूस होता है। सुदामा/ईएमएस 26 मार्च 2026