नई दिल्ली (ईएमएस)। शरीर और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने से ही व्यक्ति लंबे समय तक निरोगी रह सकता है। आयुर्वेद का मानना है कि आधुनिक समय की भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ते तनाव और अनियमित दिनचर्या के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में आयुर्वेद जीवन को स्वस्थ बनाए रखने के लिए कुछ मूल सिद्धांतों पर जोर देता है, जिनका पालन करने से शरीर और मन दोनों को संतुलित रखा जा सकता है। आयुर्वेद के अनुसार, स्वस्थ जीवन के लिए पांच प्रमुख सुरक्षा कवच माने गए हैं। इनमें मजबूत पाचन शक्ति, नियमित तेल मालिश, स्वस्थ श्वसन तंत्र, अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि व्यक्ति अपनी दिनचर्या में योग, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और सकारात्मक सोच को शामिल कर ले तो कई प्रकार की बीमारियों से बचा जा सकता है और संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है। आयुर्वेद में सबसे पहले पाचन शक्ति को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, जिसे जठराग्नि कहा जाता है। यदि पाचन शक्ति कमजोर हो जाए तो शरीर में पोषण सही तरीके से नहीं पहुंच पाता और व्यक्ति कई रोगों का शिकार होने लगता है। वहीं पाचन शक्ति मजबूत होने पर भोजन से मिलने वाले पोषक तत्व शरीर को सही ढंग से मिलते हैं। इसके लिए भोजन में अलग-अलग रसों को शामिल करने और सीमित मात्रा में देसी घी का सेवन करने की सलाह दी जाती है। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू नियमित तेल मालिश है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर की बाहरी देखभाल भी उतनी ही जरूरी है जितनी आंतरिक देखभाल। रोजाना तेल से मालिश करने से रक्त संचार बेहतर होता है और त्वचा को गहराई से पोषण मिलता है। इससे शरीर को आराम मिलता है और मांसपेशियों की थकान भी कम होती है। तीसरा सुरक्षा कवच मजबूत श्वसन तंत्र है। आज के प्रदूषित वातावरण में फेफड़ों का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। इसके लिए रोजाना प्राणायाम करने की सलाह दी जाती है। साथ ही आहार में कच्ची हल्दी, तुलसी और आंवला जैसे प्राकृतिक तत्वों को शामिल करना भी लाभकारी माना जाता है। चौथा पहलू रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाना है। आयुर्वेद में शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति को ओज कहा जाता है। इसे बढ़ाने के लिए शतावरी, गिलोय, अश्वगंधा और आंवला जैसी जड़ी-बूटियों का सेवन उपयोगी माना गया है। पांचवां और अंतिम सुरक्षा कवच मानसिक स्वास्थ्य है। विशेषज्ञों के अनुसार तनाव शरीर और मन दोनों को प्रभावित करता है। इसलिए सकारात्मक सोच, नियमित दिनचर्या और पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी है। सुदामा/ईएमएस 26 मार्च 2026