इस्लामाबाद,(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और विनाशकारी युद्ध की आशंकाओं के बीच पाकिस्तान एक मजबूत डीलमकर और मध्यस्थ के रूप में उभर रहा है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में पाकिस्तान की इस संभावित भूमिका की तुलना 1972 के उस ऐतिहासिक निक्सन कनेक्शन से की जा रही है, जिसने शीत युद्ध के दौरान अमेरिका और चीन को एक मेज पर लाकर वैश्विक राजनीति की दिशा बदल दी थी। यदि इस्लामाबाद इस शांति समझौते की मेजबानी करने में सफल रहता है, तो यह मध्य पूर्व और वैश्विक भू-राजनीति के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान, ईरान का सबसे कम विरोधी पड़ोसी है और वहां अमेरिका का कोई सैन्य ठिकाना नहीं है, जो उसे एक तटस्थ पक्ष बनाता है। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से वॉशिंगटन में पाकिस्तान का दूतावास ही ईरान के कूटनीतिक हितों का प्रतिनिधित्व करता रहा है। वर्तमान में इस कूटनीति के पीछे पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बढ़ती नजदीकियों को बड़ा कारण माना जा रहा है। इसमें क्रिप्टो कूटनीति और व्यापारिक समझौतों ने भी अहम भूमिका निभाई है, जिससे वॉशिंगटन में पाकिस्तान की साख मजबूत हुई है। पाकिस्तान के लिए यह मध्यस्थता केवल अंतरराष्ट्रीय कद बढ़ाने का विषय नहीं, बल्कि घरेलू मजबूरी भी है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी शिया आबादी वाला देश होने के नाते, ईरान में युद्ध खिंचने पर पाकिस्तान के भीतर सांप्रदायिक तनाव और हिंसक प्रदर्शनों का खतरा बढ़ गया है। साथ ही, सऊदी अरब के साथ हुए हालिया रक्षा समझौते ने पाकिस्तान पर युद्ध में कूदने का नैतिक और कूटनीतिक दबाव बना दिया है। ऐसे में बैकचैनल कूटनीति ही पाकिस्तान के लिए सुरक्षित रास्ता है। खबरों के मुताबिक, पिछले एक महीने में पाकिस्तानी नेतृत्व ने अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के साथ 30 से ज्यादा बार फोन पर चर्चा की है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संकेत दिए हैं कि वह बातचीत की मेजबानी के लिए तैयार हैं। सूत्रों का दावा है कि इसी हफ्ते इस्लामाबाद में एक उच्च-स्तरीय बैठक हो सकती है, जिसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और जेरेड कुशनर जैसे प्रमुख चेहरों के शामिल होने की संभावना है। यदि यह वार्ता सफल होती है, तो पाकिस्तान 50 साल बाद एक बार फिर वैश्विक शांति के केंद्र में होगा। वीरेंद्र/ईएमएस 26 मार्च 2026