ज़रा हटके
26-Mar-2026
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बैंकॉक (ईएमएस)। कई देशों में ऐसे मंदिर मौजूद हैं जिनकी संरचना, डिजाइन और निर्माण तकनीक शानदार है। इन मंदिरों को देखकर कोई भी आश्चर्यचकित रह जाता है। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में स्थित वाट बेंचमाबोफिट, जिसे ‘मार्बल टेंपल’ के नाम से भी जाना जाता है, अपनी खूबसूरत सफेद इटैलियन मार्बल संरचना के कारण बेहद आकर्षक लगता है। इसका संतुलित और सुव्यवस्थित डिजाइन इसे वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण बनाता है। वहीं चीन के बीजिंग में बना टेंपल ऑफ हेवन 15वीं सदी का एक ऐतिहासिक स्थल है, जिसे पूरी तरह लकड़ी से बनाया गया है। खास बात यह है कि इसके निर्माण में एक भी कील का इस्तेमाल नहीं किया गया है, और इसका गोल तथा चौकोर आकार स्वर्ग और पृथ्वी का प्रतीक माना जाता है। भारत के राजस्थान में स्थित राणाकपुर जैन मंदिर अपनी बेजोड़ नक्काशी और 1400 से अधिक खंभों के लिए प्रसिद्ध है। इनमें से कोई भी दो खंभे एक जैसे नहीं हैं, जो इसकी अनूठी कारीगरी को दर्शाते हैं। इसी तरह जापान में स्थित सेइगांतो-जी मंदिर नाची जलप्रपात के पास बना है, जहां प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिकता का अनोखा संगम देखने को मिलता है। मलेशिया के पेनांग में स्थित केक लोक सी मंदिर दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे बड़े मंदिर परिसरों में गिना जाता है। यहां चीनी, थाई और बर्मी वास्तुकला का सुंदर मिश्रण दिखाई देता है। वहीं कर्नाटक के हम्पी में स्थित विरुपाक्ष मंदिर 7वीं सदी का एक प्राचीन मंदिर है, जिसका ऊंचा गोपुरम और बारीक नक्काशी इसे खास बनाती है। स्पेन के बार्सिलोना में स्थित सागरदा फमिलिया पारंपरिक मंदिर न होते हुए भी अपनी अद्भुत वास्तुकला के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसे प्रसिद्ध वास्तुकार एंटोनी गौडी ने डिजाइन किया था और इसका निर्माण आज भी जारी है। ये सभी मंदिर इस बात का उदाहरण हैं कि आस्था के साथ-साथ वास्तुकला भी एक महान कला है। इनकी संरचना, नक्काशी और स्थान का चयन इस तरह किया गया है कि ये न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि पर्यटन और अध्ययन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। सुदामा/ईएमएस 26 मार्च 2026