राज्य
26-Mar-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। राजधानी के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर वैसे तो हर दिन अपनों को अंतिम विदाई देने वालों की भीड़ रहती है। लेकिन, बुधवार को यहां का नजारा अलग था। देश में पहली बार इच्छामृत्यु पाने वाले हरीश राणा के माता-पिता व स्वजन के साथ ही एनसीआर के लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। इन सभी की आंखों में हरीश को अंतिम विदाई देने का जहां दर्द छलक रहा था, वहीं चेहरे पर 13 साल के संघर्ष पर इच्छामृत्यु के रूप में विराम लगने का सुकून था। इस लंबे अंतराल के बीच लक्ष्मण की तरह बड़े भाई की सेवा करने वाले आशीष राणा और बहन वंदना ने उन्हें गायत्री मंत्रों के उच्चारण के बीच मुखाग्नि दी। हरीश ने अगस्त 2013 में रक्षाबंधन पर ही हादसे से पहले अंतिम बार बहन वंदना से बात की थी। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग की अंतिम वर्ष की पढ़ाई के दौरान अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन हरीश पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। हादसे के बाद क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित होने की वजह उनके हाथ-पैर निष्क्रिय हो गए थे। उनके असहनीय दर्द को देखते हुए पिता अशोक राणा की याचिका पर 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दी थी। इसके बाद एम्स में परोक्ष इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू हुई और मंगलवार शाम उनका निधन हो गया। हरीश के माता-पिता स्वजन ने गाजियाबाद में हिंडन पर अंतिम संस्कार की योजना बनाई थी। हालांकि, शव मेडिकेटेड होने के साथ ही अन्य चिकित्सीय कारणों के चलते डाक्टरों ने दिल्ली में ही अंतिम संस्कार की सलाह दी। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/26/ मार्च/2026