राष्ट्रीय
26-Mar-2026


नई दिल्‍ली,(ईएमएस)। कमोडिटी की बढ़ती कीमतों और सप्‍लाई में आ रही बाधाओं की वजह से देश पर 5.66 लाख करोड़ रुपए का खर्चा बढ़ गया है। सरकार ने खुद आंकड़े जारी कर बताया कि देश में करीब 2 हजार परियोजनाओं की लागत पहले तय की गई राशि के मुकाबले 5.66 लाख करोड़ रुपए बढ़ी है। इन परियोजनाओं पर कुल खर्च का आंकड़ा 35.32 लाख करोड़ के आसपास था, लेकिन अब लागत बढ़ने की वजह से यह आंकड़ा बढ़कर 42 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया है। मीडिया रिपोर्ट में सरकार की ओर से जारी आधिकारिक रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि देश की 150 करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत वाली प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की कुल लागत में 5.66 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का इजाफा हुआ है। फरवरी 2026 तक सांख्यिकी मंत्रालय की निगरानी वाली 1,948 परियोजनाओं की संशोधित लागत 41,98,684 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है, जबकि इनकी मूल लागत 36,32,088 करोड़ आंकी गई थी। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक इन परियोजनाओं पर अब तक कुल 19.71 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। यह खर्च परियोजनाओं की बढ़ी हुई अनुमानित लागत का करीब 46.95 फीसदी है, जो इनके क्रियान्वयन में हो रही ठोस और निरंतर प्रगति का संकेत देता है। रिपोर्ट के मुताबिक 740 परियोजनाओं ने 80 फीसदी से ज्यादा भौतिक प्रगति हासिल कर ली है, जबकि 250 परियोजनाएं वित्तीय रूप से 80 फीसदी पूरी हो चुकी हैं। क्षेत्रवार विवरण के मुताबिक कोयला मंत्रालय के पास 128, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पास 113 और बिजली मंत्रालय के पास 101 बुनियादी ढांचा परियोजनाएं हैं। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत क्रमशः 2.4 लाख करोड़ रुपए, 5.15 लाख करोड़ और 5.25 लाख करोड़ रुपए है। फरवरी के दौरान 9 प्रमुख परियोजनाएं पूरी की गईं, जिनमें ‘त्रिवेंद्रम-कन्याकुमारी’ रेलवे लाइन और पाटा की ‘पीपी परियोजना’ शामिल हैं। इसी महीने 268 नई परियोजनाओं को निगरानी तंत्र के दायरे में लाया गया है। इनमें मुंबई रिफाइनरी की नई इकाई और ‘केन-बेतवा लिंक’ जैसी बड़ी योजनाएं शामिल हैं। सिराज/ईएमएस 26मार्च26