इजराइल रणनीतिक और तकनीकी सहयोग में अग्रणी नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत की विदेश नीति ने हाल ही में एक नया आयाम प्राप्त किया है। केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सर्वदलीय बैठक में बेबाकी और ठोस अंदाज में बताया कि भारत अब किसी बाहरी दबाव में नहीं झुकता और अपने राष्ट्रीय हितों के लिए हर मोर्चे पर संतुलित और आक्रामक रणनीति रखता है। उन्होंने कहा कि इजराइल ने भारत को सैन्य संघर्षों में महत्वपूर्ण मदद दी और रक्षा प्रौद्योगिकी में भरोसेमंद साझेदार साबित हुआ। यह बयान पहले छुपी हुई कूटनीतिक हकीकत को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने जैसा था। बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि अमेरिका भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार और उच्च तकनीक का स्रोत है, जबकि इजराइल रणनीतिक और तकनीकी सहयोग में अग्रणी है। विपक्ष द्वारा अमेरिका और इजराइल के साथ भारत की नजदीकियों पर सवाल उठने के बावजूद, जयशंकर ने इन सवालों का जवाब तथ्यों के साथ दिया। जयशंकर ने बैठक को संबोधित कर कहा कि भारत ने कई मोर्चों पर अपनी ताकत दिखाई है। इजराइल के साथ मजबूत रक्षा संबंधों के साथ ही भारत ने ईरान के साथ भी संतुलित और स्थिर संबंध बनाए रखे। होर्मुज जलडमरूमध्य से चार भारतीय जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति देने जैसे कदम भारत की सामरिक स्थिति की मजबूती को दिखाते हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता के निधन पर भारत ने समय पर शोक संवेदना व्यक्त कर यह संदेश दिया कि वह किसी एक पक्ष के साथ खड़ा नहीं होता। साथ ही, खाड़ी देशों में रहने वाले अस्सी लाख भारतीयों की सुरक्षा को प्राथमिकता देकर भारत ने संतुलन बनाए रखा। ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच न ईरान से दूरी बनाई और न ही खाड़ी देशों की अनदेखी की। कोच्चि बंदरगाह पर ईरानी नौसैनिक जहाज को सुरक्षित ठिकाना देने से भारत की समुद्री रणनीति और निर्णायक भूमिका भी उजागर हुई। अब भारत की यह रणनीति वैश्विक मंच पर और स्पष्ट होगी। जयशंकर जी-7 देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने फ्रांस गए हैं, जहां भारत न केवल अपनी बात रखेगा, बल्कि द्विपक्षीय वार्ता के जरिए नए समीकरण भी बनाएगा। रणनीतिक दृष्टि से भारत ने अमेरिका, इजराइल और ईरान जैसे तीन बड़े शक्ति केंद्रों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखकर यह दिखाया कि वह वैश्विक राजनीति में अपनी रणनीति समझदारी से लागू करने में सक्षम है। भारत अब वैश्विक एजेंडा तय करने वाला देश बन चुका है। वह अपने हितों को सर्वोपरि रखता है, अपनी शर्तों पर संबंध बनाता है और जरूरत पड़ने पर हर मोर्चे पर सख्त रुख अपनाता है। नया भारत न तो दबाव में आता है, न भ्रम में पड़ता है। यह देश वैश्विक राजनीति के शतरंज पर हर चाल सोच-समझकर चलाता है और हर बार खेल को अपने पक्ष में मोड़ देता है। आशीष दुबे / 26 मार्च 2026