क्षेत्रीय
26-Mar-2026
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- हाईकोर्ट ने किया सवाल, “एक डॉक्टर 26 लैब में कैसे साइन कर रहे?” जबलपुर, (ईएमएस)। मप्र हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायाधीश विनय सराफ की युगलपीठ ने पैथोलॉजी जांच रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर कई सवाल खड़े किए है| दरअसल यह मामला सरकार के उस आदेश से जुड़ा हुआ है जिसमें एक पैथोलॉजिस्ट को अधिकतम 2 लैब तक सीमित किया गया है। इस आदेश को अलग-अलग संगठनों महाकौशल एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजिस्ट, एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट मेडिकल प्रैक्टिशनर्स, मेडिकल लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और नर्सिंग होम्स एसोसिएशन, जबलपुर ने हाईकोर्ट में चुनौती दी हैं। कुछ याचिकाकर्ता इस नियम का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ इसका विरोध कर रहे हैं। इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने साफ कहा कि लोगों को सही और विश्वसनीय मेडिकल रिपोर्ट मिलना उनका मौलिक अधिकार है और इस मामले में सरकार की चिंता पूरी तरह जायज है। इस मामले में अगली सुनवाई 12 मई 2026 को होगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बेहद अहम और सीधा सवाल किया, “एक पैथोलॉजिस्ट एक दिन में कितनी रिपोर्ट दे सकता है?” कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां एक ही पैथोलॉजिस्ट 26 अलग-अलग लैब्स में रिपोर्ट साइन कर रहा है। यह बेहद चिंताजनक है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि सरकार ने 22 अक्टूबर 2024 को नियम बनाए और सिर्फ पोस्ट ग्रेजुएट पैथोलॉजिस्ट को लैब संचालन का अधिकार दिया, लेकिन अभी भी कई जगह पर गैर-योग्य टेक्नीशियन लैब चला रहे हैं। अपंजीकृत लोग रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं, जिससे मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ हो रहा है। सुनील साहू / मोनिका / 26 मार्च 2026/ 06.25