मुंबई,(ईएमएस)। महाराष्ट्र के सातारा जिले में हाल ही में हुए जिला परिषद चुनाव के दौरान हुई घटनाओं ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान कथित पुलिस हस्तक्षेप, जनप्रतिनिधियों के साथ दुर्व्यवहार और मतदान को प्रभावित करने के आरोपों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। आरोप है कि पुलिस ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के कुछ सदस्यों को मतदान स्थल पर पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया, जिससे मतदान की संख्या प्रभावित हुई। विपक्षी दलों का कहना है कि यह कार्रवाई चुनाव परिणाम को प्रभावित करने के उद्देश्य से की गई। घटना के दौरान शिवसेना (शिंदे गुट) के एक मंत्री के साथ कथित मारपीट और एक सांसद को सीढ़ियों से घसीटने की भी खबरें सामने आईं। इन घटनाओं के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया। बताया जा रहा है कि दो सदस्यों के मतदान से वंचित रहने के कारण चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ और भाजपा समर्थित उम्मीदवार को जीत मिली। चुनाव परिणामों के अनुसार, 65 सदस्यीय जिला परिषद में भाजपा को 27 सीटें, एनसीपी को 20 और शिवसेना (शिंदे गुट) को 15 सीटें मिली थीं। बहुमत के लिए 33 सीटों की आवश्यकता थी। ऐसे में एनसीपी और शिवसेना के गठबंधन को बढ़त मिलती दिखाई दे रही थी, लेकिन अंतिम परिणाम भाजपा के पक्ष में गया, जिस पर विपक्ष ने गंभीर आपत्ति जताई है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र विधानसभा और विधान परिषद में जोरदार हंगामा देखने को मिला। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में इस घटना को “लोकतंत्र की हत्या” करार देते हुए पुलिस पर दुरुपयोग का आरोप लगाया। वहीं मुख्यमंत्री ने मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। विधान परिषद में भी यह मुद्दा गूंजा, जहां उपसभापति द्वारा संबंधित पुलिस अधिकारी के निलंबन की घोषणा की गई, हालांकि बाद में इस निर्णय को निरस्त कर दिया गया। इससे सियासी विवाद और गहरा गया। विपक्षी दलों ने सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह घटना न केवल प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, बल्कि गठबंधन राजनीति की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सातारा की यह घटना आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डाल सकती है। फिलहाल सभी की नजर प्रस्तावित जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हुई है। हिदायत/26/03/2026