* कांग्रेस का भाजपा सरकार पर तीखा हमला-राजकोषीय अनुशासन में कमी, योजनाओं में कटौती और विकास की रफ्तार धीमी होने के आरोप अहमदाबाद (ईएमएस)| गुजरात विधानसभा के सत्र के अंतिम दिन प्रस्तुत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इन आंकड़ों को लेकर गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति के मीडिया संयोजक और प्रवक्ता डॉ. मनीष दोशी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला करते हुए इसे वित्तीय कुप्रबंधन और घोटालों से घिरा शासन बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात का सार्वजनिक कर्ज 3.80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 22 हजार करोड़ रुपये अधिक है। राज्य सरकार की बाजार से ली गई उधारी 3.11 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जिसमें 16 हजार करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है। केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता में भी कमी देखी गई है। आदिवासी उपयोजनाओं के लिए 2023-24 में 1,590.17 करोड़ रुपये मिले थे, जो 2024-25 में घटकर 1,363 करोड़ रुपये रह गए। इसी तरह, केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत 7,540 करोड़ रुपये के मुकाबले 2024-25 में केवल 6,712.86 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। शहरी क्षेत्रों में खराब होती वायु गुणवत्ता के बावजूद 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों को अपेक्षा से कम फंड मिला, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। वर्ष 2024-25 में राजस्व खर्च में 10,326 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई, जबकि राजस्व आय में 4,208 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। वित्तीय अनुशासन के अभाव के कारण राजस्व अधिशेष में 43.41 प्रतिशत की गिरावट आई है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि राज्य की 11.66 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है, यानी 84 लाख से अधिक नागरिकों के लिए जीवन कठिन हो गया है। वहीं, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत 3.54 करोड़ लोग लाभार्थी हैं, जो कुल आबादी का 54 प्रतिशत है। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच सीएजी रिपोर्ट ने राज्य की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ने की ओर इशारा किया है। 2024-25 के दौरान 1,108 करोड़ रुपये की राशि को संदिग्ध रूप से आय के रूप में दर्शाया गया है, जिस पर सवाल उठाए गए हैं। चौथे राज्य वित्त आयोग के गठन में देरी के कारण पंचायतों को कम अनुदान मिला, जिससे राज्य के लगभग 18,000 गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित रह गए। आपदा प्रबंधन के लिए भी केंद्र से कम सहायता मिलने का उल्लेख किया गया है। राज्य सरकार द्वारा 63 सार्वजनिक उपक्रमों में 1.24 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया, लेकिन इनमें से केवल 6 उपक्रमों ने ही लाभ दिया। 6.53 प्रतिशत की लागत पर लिए गए कर्ज के मुकाबले मात्र 1.75 प्रतिशत का ही रिटर्न मिला, जो निवेश की खराब स्थिति को दर्शाता है। इसके अलावा, पिछले दो दशकों से सरकारी खर्च का पूरा हिसाब प्रस्तुत नहीं किया गया है। वर्ष 2001-02 से 2023-24 के बीच दिए गए 7,431 करोड़ रुपये का उपयोग विवरण उपलब्ध नहीं है। 18 विभागों द्वारा 4,258 उपयोग प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किए गए, जिससे यह सवाल उठता है कि यह राशि कहां और कैसे खर्च की गई। सीएजी ने इन अनियमितताओं पर गंभीर टिप्पणी करते हुए सरकारी विभागों की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। सतीश/26 मार्च