दोनों नेताओं ने होर्मुज को खुला, सुरक्षित और सुचारु बनाए रखने पर दिया जोर नई दिल्ली,(ईएमएस)। ईरान युद्ध के बीच पीएम मोदी और ट्रंप की एक टेलीफोनिक बातचीत में एलन मस्क की मौजूदगी ने सबको हैरान कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक गंभीर भू-राजनीतिक संकट के दौरान दो राष्ट्राध्यक्षों की चर्चा में एक निजी नागरिक का शामिल होना एक असामान्य घटना है। इस बातचीत का मुख्य विषय पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और उसके वैश्विक प्रभाव थे। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला, सुरक्षित और सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया गया। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बहुत अहम है और विश्व ऊर्जा बाजार की स्थिरता में इसकी बड़ी भूमिका है। वैसे ऐसी तमाम अटकलों पर विदेश मंत्रालय ने विराम लगाते हुए आधिकारिक बयान जारी किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि इस संवाद का केंद्र केवल आपसी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता था और यह बातचीत केवल पीएम मोदी और ट्रंप के बीच ही हुई। जबकि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि एलन मस्क इस कॉल का हिस्सा थे। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लिया या नहीं, लेकिन उनकी मौजूदगी कई सवाल खड़े कर रही है। मस्क की कंपनियों का मध्य पूर्वी संप्रभु वेल्थ फंड्स के साथ गहरा निवेश संबंध है। मस्क लंबे समय से भारत में व्यावसायिक अवसरों की तलाश कर रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में ट्रंप और मस्क के बीच संबंधों में काफी सुधार हुआ है, जो इस कॉल में उनकी मौजूदगी का एक बड़ा कारण हो सकता है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की रणनीतिक जरुरत पर विस्तार से चर्चा की। वहीं, पीएम मोदी ने एक्स पर कहा कि भारत तनाव कम करने और जल्द शांति बहाल करने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर लगातार संपर्क बनाए रखने पर सहमति बनी है। भारत की ओर से जारी बयान में यह भी कहा गया कि होर्मुज के जरिए सुरक्षित आवाजाही वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत जरुरी है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब ट्रंप ने पांच दिनों के लिए हमले टालने की घोषणा की थी, जिससे तनाव कम होने की उम्मीद जगी है। इसी बीच खबरें है कि अमेरिका अपने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को पाकिस्तान भेज सकता है, जहां ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत हो सकती है। यह कदम क्षेत्र में कूटनीतिक समाधान की दिशा में एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। भारत की ओर से भी सक्रिय कूटनीतिक पहल जारी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बातचीत कर इस संकट के वैश्विक बाजार और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की। साथ ही, उन्होंने भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली से भी मुलाकात की और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने ट्रंप के सैन्य कार्रवाई टालने के फैसले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ किया कि भारत का मानना है कि इस संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। भारत, अमेरिका के नेतृत्व वाले उस नौसैनिक गठबंधन में शामिल होने को लेकर उत्सुक नहीं दिखा जिसका उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित बनाए रखना है। यह रुख भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और संतुलित कूटनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। सिराज/ईएमएस 28मार्च26 --------------------------------