अंतर्राष्ट्रीय
29-Mar-2026
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-सेना में भर्ती की न्यूनतम उम्र घटाकर 12 साल की, कई देशों ने जताई आपत्ति नई दिल्ली,(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में जारी संकट ने वैश्विक स्तर पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। यह लंबे समय तक चलने वाले टकराव का रूप ले सकता है। अमेरिका और इजराइल द्वारा तेहरान पर किए गए हमले के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा था कि ईरान झुक जाएगा, लेकिन ईरान की रणनीतिक तैयारी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसकी पकड़ ने परिस्थितियों को पूरी तरह बदल दिया। इस कदम से अमेरिका को भी इस संघर्ष में उलझन का सामना करना पड़ रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने अपनी सैन्य और रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ जनशक्ति बढ़ाने पर भी ध्यान दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक तेहरान ने दावा किया है कि लाखों सैनिक देश की रक्षा के लिए तैयार हैं और जरूरत पड़ने पर वे किसी भी संभावित अमेरिकी खतरे का सामना करने के लिए सक्षम हैं। इसी बीच ईरान द्वारा सेना में भर्ती की न्यूनतम उम्र को घटाकर 12 साल करने का फैसला लिया गया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इस फैसले के बाद नाबालिगों के सैन्य उपयोग को लेकर मानवाधिकार संगठनों और कई देशों ने आपत्ति जताई है। बता दें दूसरे विश्व युद्ध में जर्मनी में युवाओं को सहायक भूमिकाओं में भर्ती किया गया था, जबकि इराक के सद्दाम हुसैन ने ‘अशबाल सद्दाम’ नामक संगठन बनाकर बच्चों को सैन्य प्रशिक्षण और वैचारिक रूप से तैयार किया था। इस संगठन का उद्देश्य भविष्य के लिए एक कट्टर और वफादार सेना तैयार करना था, जो सीधे नेतृत्व के प्रति समर्पित हों। विशेषज्ञों का मानना है कि नाबालिगों को सैन्य और वैचारिक प्रशिक्षण देना समाज की मानसिक संरचना को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है। ईरान की मौजूदा नीति को भी कुछ विश्लेषक उसी दिशा में एक कदम मान रहे हैं, जहां भविष्य के लिए वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध सैनिक तैयार किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन युवाओं को गश्त, चेकपॉइंट और लॉजिस्टिक जैसी सहायक भूमिकाओं में शामिल किया जा सकता है। बता दें इराक के कुवैत पर 1990 में किए गए हमले और उसके बाद के हालात भी इस तरह के सैन्य मॉडल के परिणामों की ओर संकेत करते हैं, जहां लंबे संघर्ष और अस्थिरता ने क्षेत्र को गहराई से प्रभावित किया था। बाद में इराक में सत्ता परिवर्तन और आईएसआईएस जैसे संगठनों के उभरने ने इस बात को और स्पष्ट किया कि सैन्य और वैचारिक प्रशिक्षण का प्रभाव आने वाले सालों तक बना रह सकता है। ईरान ने भी इराक के अनुभवों से सीख लेते हुए अपनी सत्ता संरचना को विकेंद्रीकृत किया है, जिससे नेतृत्व में बदलाव के बावजूद उसकी व्यवस्था स्थिर बनी रह सके। सिराज/ईएमएस 29 मार्च 2026