वॉशिंगटन(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि अमेरिका ईरान के साथ लंबे समय तक सैन्य संघर्ष में उलझे रहने का इच्छुक नहीं है। एक हालिया पॉडकास्ट इंटरव्यू में वेंस ने अमेरिकी रणनीति का खुलासा करते हुए कहा कि प्रशासन का लक्ष्य वहां केवल अपना निर्धारित कार्य पूरा करना है, न कि वर्षों तक अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखना। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि अमेरिका एक या दो साल की लंबी योजना नहीं बना रहा है, बल्कि अपना काम पूरा होते ही जल्द से जल्द वहां से बाहर निकल जाएगा। उनके इस बयान को वैश्विक स्तर पर एक सीमित और त्वरित सैन्य हस्तक्षेप के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उपराष्ट्रपति वेंस ने यह भी तर्क दिया कि वर्तमान सैन्य अभियान का उद्देश्य भविष्य में होने वाली किसी भी बड़ी सैन्य आवश्यकता को जड़ से समाप्त करना है। उन्होंने इसे एक ऐसी रणनीति बताया जो लंबे समय तक चलने वाले थकाऊ युद्धों से अमेरिका को बचाएगी। साथ ही, उन्होंने एक राहत भरी उम्मीद जताते हुए दावा किया कि जैसे ही क्षेत्र में हालात सामान्य होंगे, वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता आएगी और ईंधन की कीमतों में गिरावट दर्ज की जाएगी। विदित हो कि इस संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी अस्थिरता देखी गई है। कूटनीतिक मोर्चे पर भी एक अहम मोड़ आया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर होने वाले संभावित हमलों को फिलहाल 10 दिनों के लिए टालने का निर्णय लिया है, जिसकी नई समयसीमा अब 6 अप्रैल तय की गई है। राष्ट्रपति के अनुसार, यह फैसला ईरान के अनुरोध पर लिया गया है और दोनों पक्षों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है। दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अपने पड़ोसी देशों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि वे अपनी धरती का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य संचालन के लिए न होने दें। यह चेतावनी विशेष रूप से उन खाड़ी देशों के लिए है जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। पेजेशकियान ने स्पष्ट किया कि ईरान पहल करके युद्ध नहीं चाहता, लेकिन यदि उसके बुनियादी ढांचे या आर्थिक केंद्रों को निशाना बनाया गया, तो इसका करारा जवाब दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच यह टकराव अब अपने दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है। इस तनाव की शुरुआत 28 फरवरी को हुए उन अमेरिकी हवाई हमलों के बाद हुई थी, जिनमें ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए थे। फिलहाल, दुनिया की नजरें 6 अप्रैल की समयसीमा और दोनों देशों के बीच जारी गुप्त वार्ताओं पर टिकी हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/29मार्च2026 --------------------------------