नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) अधिनियम में बड़े संशोधन प्रस्तावित कर रहा है। इसका उद्देश्य छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देना है। अब छोटे मामलों में कारावास की जगह तर्कसंगत आर्थिक दंड का प्रावधान होगा, जिससे नागरिकों और व्यापारियों को अनावश्यक कानूनी उलझनों और बोझ से मुक्ति मिलेगी। एमसीडी ने लोगों को राहत देने और प्रशासन को और ज़्यादा पारदर्शी एवं व्यावहारिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली नगर निगम अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन से सरल जीवनयापन (और व्यापार का सरलीकरण को बढ़ावा, कारावास के प्रावधान खत्म करने की तैयारी की जा रही है। दिल्ली नगर निगम द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 में बड़े संशोधन और सुधार प्रस्तावित किए गए हैं, जिनके अनुसार छोटे-छोटे नियमों के उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर नागरिक-अनुकूल व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इन प्रस्तावित संशोधनों के अंतर्गत अब दिल्ली नगर निगम द्वारा छोटे और तकनीकी उल्लंघनों पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। दावा किया जा रहा है कि इस कदम से लोगों को ना सिर्फ गैर जरूरी कानूनी उलझनों से मुक्ति मिलेगी, बल्कि सामाजिक अपमान और प्रशासनिक बोझ में भी कमी आएगी। एमसीडी का दावा है कि यह बदलाव दंडात्मक व्यवस्था से हटकर सहयोगात्मक और अनुपालन-आधारित प्रणाली की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। अजीत झा /देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/30/मार्च/2026