राज्य
30-Mar-2026
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- सोलर प्लाट लगाकर बिजली बनाने वाले उपभोक्ताओं पर सात का भार भोपाल (ईएमएस)। मप्र में सोलर को बढ़ावा देने में जुटी सरकार ने अपने ही उपभोक्ताओं पर टैरिफ का बोझ लाद दिया है। आम उपभोक्ता पर जहां औसत 4.80 प्रतिशत की बिजली दर में बढ़ोतरी हुई है वहीं सोलर प्लाट लगाकर बिजली बनाने वाले उपभोक्ताओं पर बढ़ोतरी की मार सात प्रतिशत है। यानि तीन सौ यूनिट मासिक बिजली सोलर से बनाकर ग्रिड पर देने और रात में उसे वापस लेने पर अभी उपभोक्ताओं को जहां 560 रुपये देना होता था, उन्हें अब अप्रैल माह से यह राशि 600 रुपये देना होगी। बता दें कि मप्र विद्युत नियामक आयोग ने 2026-27 के लिए टैरिफ मंजूर कर दिया है। नए टैरिफ में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत घर में सोलर प्लाट लगाए गए हैं। कई निजी कंपनियां जो सोलर प्लाट लगाती हैं, वो इस योजना में बिजली का बिल माफ करने जैसा दावा करती हैं लेकिन हकीकत में बिजली कंपनी इस सुविधा को लेने का भी शुल्क लेती है। दो रुपये प्रति यूनिट सोलर अवधि में जो बिजली पैदा होती है उसे ग्रिड के जरिए दिया जाता है, बाद में शाम के वक्त उपभोक्ता जब उसी बिजली को उपयोग के लिए लेता हैं तो उसे शुल्क देना होता है। अभी तक यह 1.87 रुपये प्रति यूनिट दर तय की गई थी। अब बिजली कंपनी की मांग पर आयोग ने इसे दो रुपये प्रति यूनिट कर दिया है। प्रति यूनिट खपत से जोड़ा यानि जहां पहले 28 रुपये प्रति 15 यूनिट के लिए देय था, उसे बढ़ाकर 30 रुपये प्रति 15 यूनिट कर दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य प्रदेश में फिक्स चार्ज निर्धारण की पद्धति अन्य राज्यों से भिन्न है। अधिकांश राज्यों में यह स्वीकृत लोड (किलोवाट) के आधार पर तय होता है, जबकि यहां इसे प्रति यूनिट खपत से जोड़ा गया है। हताश होंगे उपभोक्ता सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि मप्र विद्युत नियामक आयोग ने जिस तरह यह राशि बढ़ाई है उससे सोलर प्लाट लगाने की सरकार की मुहिम को धक्का लगेगा। लाखों रुपये खर्च कर सोलर प्लांट लगाने के बाद जब उपभोक्ता को सबसे ज्यादा टैरिफ देना होगा तो इससे उनकी रूचि कम होगी। इससे प्राकृतिक रूप से बिजली पैदा करने की मुहिम प्रभावित होगी। उन्होंने टैरिफ बढ़ोतरी को गलत बताया है। राजेंद्र अग्रवाल के अनुसार देश के कई राज्यों में सौर ऊर्जा अपनाने वाले उपभोक्ताओं को प्रोत्साहन के रूप में रियायतें और फिक्स चार्ज में छूट दी जाती है, जबकि मध्य प्रदेश में इसके विपरीत स्थिति बन रही है। प्रदेश में वर्तमान में 50 हजार से अधिक उपभोक्ता सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली बिल में राहत पाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में प्रति यूनिट दरों में वृद्धि और फिक्स चार्ज में इजाफा उनके लिए दोहरी मार साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस विसंगति को दूर नहीं किया गया, तो सौर ऊर्जा अपनाने की गति प्रभावित हो सकती है। विनोद / 30 मार्च 26