अंतर्राष्ट्रीय
30-Mar-2026


सिडनी,(ईएमएस)। ईरान संघर्ष की वजह से मिडिल ईस्ट में भारी तनाव बना हुआ है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के हमलों का जवाब मिडिल ईस्ट में अमेरिकी संपत्ति और बेस को टारगेट बनाकर दिया जा रहा है। इसमें मिडिल ईस्ट देशों को भारी नुकसान हो रहा है। इस बीच ईरान के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई के पीछे के रणनीतिक मकसद को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। अमेरिकी कांग्रेस के बाद अब ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के खिलाफ कार्रवाई के पीछे का मकसद जाहिर करने को कह दिया है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री अल्बानीज ने ईरान में युद्ध के मकसद पर ट्रंप से साफ निर्देश की मांग की है। साथ ही उन्होंने तनाव कम करने की बात कही है। अल्बानीज ने कहा, मैं युद्ध के मकसद के बारे में और सुनिश्चित होना चाहता हूं और मैं तनाव कम होते देखना चाहता हूं। संयुक्त अरब अमीरात की अपील के बाद उसकी रक्षा में मदद के लिए ऑस्ट्रेलिया ने एयरक्राफ्ट तैनात किए हैं। हालांकि ऑस्ट्रेलिया ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने में मदद के लिए नौसेना बल भेजने से इंकार किया है। इसके पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए दूसरे देशों से युद्धपोत भेजने की अपील की थी। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति को मामले में न नाटो देशों से कोई मदद मिली न ही यूरोप से कोई मदद मिली। ताजा मामले में ईरान ने कुवैत पर हमला किया। हमले में एक भारतीय की मौत हो गई। कतर के विदेश मंत्रालय ने कुवैत में एक कैंप, पावर स्टेशन और पानी के खारेपन को कम करने वाले प्लांट को निशाना बनाने वाले ईरान के घिनौने हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। कुवैती अधिकारियों ने कहा कि देश के बिजली और जल मंत्रालय के अनुसार, बिजली और डीसेलिनेशन फैसिलिटी पर हुए हमले में एक भारतीय मजदूर की मौत हो गई, जिससे साइट पर एक सर्विस बिल्डिंग को भी नुकसान पहुंचा। आशीष दुबे / 30 मार्च 2026