वाशिंगटन,(ईएमएस)। ईरान जंग बीतते दिनों के साथ गंभीर होती जा रही है। जहां तेहरान झुकने को तैयार नहीं है और अमेरिका से भी कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। इसी बीच, मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी सैनिकों की तादाद 50 हजार के पार पहुंच गई है, जो आम दिनों के मुकाबले करीब 10 हजार ज्यादा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2500 मरीन और 2500 नाविकों के नए जत्थों के दाखिल होने से इलाके में अमेरिकी घेराबंदी मजबूत हुई है। इसके बाद आंशका हैं कि किसी भी वक्त कुछ भी हो सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ एक महीने से चल रहे युद्ध में अपने अगले कदम पर फैसला लेने वाले हैं। अमेरिकी सेना के 82वीं एयरबोर्न डिवीज़न के 2000 पैराट्रूपर्स भी ईरान से हमला करने लायक दूरी के अंदर तैनात किए गए हैं। यह सैन्य जमावड़ा होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलने और ईरानी हमलों का जवाब देने के लिए किया गया है। हालांकि, सेना से जुड़े जानकार चेतावनी दे रहे हैं कि ईरान जैसे बड़े देश पर कब्जा करने के लिए 50 हजार सैनिकों की तादाद बहुत कम है। फिलहाल अमेरिकी लड़ाकू विमान ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप सहित 90 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर बमबारी कर चुके हैं। दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल जिस संकरे जलमार्ग से गुजरता है, वह ईरानी सेना के हमलों की वजह से काफी हद तक बंद हो चुका है। ट्रंप प्रशासन रास्ते को फिर से सुरक्षित करने के लिए किसी द्वीप या जमीन के हिस्से पर कब्जे की कोशिश कर सकता है। 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट के सैनिकों को इसी तरह के कठिन सामरिक ऑपरेशन्स के लिए स्टैंडबाय पर रखा गया है, जिससे तेल की वैश्विक आपूर्ति बहाल की जा सके। बात दें कि अमेरिका रक्षा विभाग पेंटागन ने हाल ही में 2,000 पैराट्रूपर्स को मिडिल ईस्ट भेजा है, जिनकी लोकेशन फिलहाल सीक्रेट रखा गया है। जानकारों का मानना है कि इन सैनिकों का इस्तेमाल उत्तरी फारसी खाड़ी में स्थित ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र, खार्ग द्वीप पर कब्जा करने के लिए हो सकता है। मरीन सैनिकों के साथ मिलकर ये पैराट्रूपर्स जमीन पर बड़े ऑपरेशन को अंजाम दे सकते हैं, जिससे ईरान की आर्थिक कमर तोड़ी जा सके। आशीष दुबे / 30 मार्च 2026