- केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी मिलते ही होगी जारी भोपाल (ईएमएस)। मध्यप्रदेश में निगम, मंडल, प्राधिकरण और आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियों का लंबा इंतजार अब जल्द खत्म हो सकता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में हुई बैठक में संभावित नामों की सूची लगभग तय कर ली गई है। इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल शामिल रहे। मुख्यमंत्री निवास पर प्रदेश संगठन के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ भी इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई। जानकारी के अनुसार इस सूची में 50 से ज्यादा नेताओं के नाम शामिल हैं। इससे पहले केंद्रीय नेतृत्व ने सूची वापस भेजकर कुछ और नाम जोडऩे को कहा था, जिसके बाद प्रदेश संगठन ने इसमें संशाोधन किया। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस सूची को लेकर दिल्ली जा सकते हैं। केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी मिलने के बाद नियुक्तियों का ऐलान किया जाएगा। संभावना है कि अप्रैल के पहले सप्ताह में इन पदों पर नियुक्तियां हो सकती हैं। जहां-जहां नामों को लेकर विवाद की स्थिति है, वहां फिलहाल नियुक्तियां टाली जा सकती हैं। बाकी पदों पर सहमति बनने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। बता दें इससे पहले प्रदेश में 123 नगर परिषद और 46 नगर पालिका में 750 से अधिक एल्डरमैंनों की नियुक्ति की गई। साथ ही ग्वालियर से आने वाले फायर ब्रांड हिंदूवादी नेता जयभान सिंह पवैया को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया। 4 और 5 को होगी संघ की समन्वय बैठक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की समन्वय बैठक 4 और 5 अप्रैल को भोपाल के शारदा विहार में होगी। इसमें संघ के 37 अनुशांगिक संगठनों के साथ भाजपा भी शामिल होगी। समन्वय बैठक में पार्टी के ओर से प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल हो सकते हैं। समन्वय बैठक की तैयारियों को लेकर सीएम हाउस में हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश अध्यक्ष से चर्चा की। इस बैठक में संघ पदाधिकारी दीपक विस्पुते, वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय मौजूद थे। भोपाल में होने वाली समन्वय बैठक में संघ के सह कार्यवाह अरुण कुमार भी शामिल होंगे। अरुण कुमार संघ और भाजपा में समन्वय का काम देखते हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में प्रदेश संगठन महामंत्री की नियुक्ति को लेकर भी चर्चा होगी। गौरतलब है कि संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठक हाल ही में हुई है। ऐसे में राजधानी में होने वाली समन्वय बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैठक में संघ एक साल की कार्ययोजना पर भी चर्चा करेगा। इसके अलावा संघ अपने 32 अनुशांगिक संगठनों के दायित्वों में बदलाव को लेकर भी चर्चा करेगा। संघ की इस बैठक से पहले सत्ता और संगठन के बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। आरएसएस ने अपनी संगठनात्मक संरचना में बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत प्रांत प्रचारक का पद खत्म कर दिया है। इसके स्थान पर संभागीय प्रचारक का नया पद बनाया गया है। हरियाणा के पट्टीकल्याणा (समालखा) में आयोजित संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में यह बदलाव हुआ था। भोपाल में होने वाली समन्वय बैठक में इस बदलाव पर भी चर्चा होगी। प्रदेश सहित देशभर में नई व्यवस्था मार्च 2027 से लागू हो जाएगी। संघ बदली संगठनात्मक संरचना को देखते हुए आगे की रणनीति तय करेगा। सत्ता-संगठन में नियुक्तियों पर जोर दरअसल प्रदेश में साल 2027 में नगरीय निकाय चुनाव होना है। इसके बाद विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो जाएगी। इधर, सरकार और संगठन पिछले कई महीने से राजनीतिक नियुक्तियां करने की तैयारी में जुटा है, लेकिन अब तक निगम मंडल और बड़े शहरों के विकास प्राधिकरणों में नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं। संघ इनमें जल्द नियुक्ति का पक्षधर है। संघ की इच्छा को ध्यान में रख नगर पालिका और नगर परिषदों में 768 एल्डरमैन की नियुक्तियां की गई हैं। अब जल्द ही प्रदेश के 16 नगर निगमों में भी एल्डरमैन की नियुक्ति करने की तैयारी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को कार्यभार संभाले हुए करीब 8 महीने हो गए हैं। अब तक संगठन की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। समन्वय बैठक में इस पर चर्चा हो सकती है। कार्यकारिणी घोषित होने के बाद भाजपा प्रदेश कार्य समिति की बैठक आयोजित करेगी। भाजपा की पिछली कार्यकारिणी में 237 सदस्य थे। इस बार कार्यकारिणी में सदस्यों की संख्या बढ़ सकती है। दरअसल प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संकेत दे दिए हैं कि अप्रैल में विस्तारित टीम के साथ पहली कार्यसमिति बैठक आयोजित होगी। इससे पहले सभी नियुक्तियां की जा रही है। इस बार कार्यकार्यकारिणी में युवा और नए चेहरों को शामिल करके पार्टी संगठन में नई ऊर्जा भरने की कोशिश में है। इसके लिए प्रदेश स्तर ही नहीं, अब जिला और मंडल स्तर पर भी संगठनात्मक गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं। विनोद / 31 मार्च 26