* सम्राट संप्रति म्यूज़ियम का भव्य उद्घाटन: महावीर जयंती पर संस्कृति और विरासत का गौरवमय उत्सव अहमदाबाद (ईएमएस)| सम्राट संप्रति म्यूज़ियम के उद्घाटन अवसर पर भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक के पावन दिन पर उनके चरणों में कोटि-कोटि वंदन करते हुए मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र के साथ भारतीय संस्कृति, धर्म और विरासत के गौरव को पुनः स्थापित किया है। उनके मार्गदर्शन में यह वर्ष भारत के गौरव और स्वाभिमान के पुनर्जागरण का वर्ष बन रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व जैसे ऐतिहासिक उत्सवों के माध्यम से हजारों वर्षों की अटूट आस्था और पुनरुत्थान की यात्रा को याद करते हुए भारतीय संस्कृति का गौरव विश्वभर में पुनः प्रकट हुआ है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में धर्म, आस्था और सनातन संस्कृति के संरक्षण तथा विरासत के सम्मान का यह भारत विरासत महोत्सव एक सशक्त उदाहरण है। उन्होंने बताया कि ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के माध्यम से लाखों प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण और संरक्षण किया गया है। प्राकृत और पाली भाषाओं में उपलब्ध जैन साहित्य गहन ज्ञान का भंडार है, और इन भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देकर इस धरोहर को सुरक्षित किया गया है। संसद परिसर में समेट शिखर का चित्रण हो या विदेशों से प्राचीन मूर्तियों की वापसी—इन प्रयासों से जैन दर्शन को वैश्विक पहचान मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जैन धर्म केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि आज के समय में भी अत्यंत प्रासंगिक है और भगवान महावीर के विचार विश्व को शांति का मार्ग दिखा सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कोबा जैन तीर्थक्षेत्र में बने इस म्यूज़ियम में लगभग 2000 से अधिक दुर्लभ प्राचीन अवशेष, पांडुलिपियाँ और कलात्मक नमूने प्रदर्शित किए गए हैं। सात गैलरियों में जैन धर्म के विकास को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने इस म्यूज़ियम को केवल संग्रहालय नहीं, बल्कि जैन दर्शन और आध्यात्मिकता के बीच एक सशक्त सेतु बताया, जो आने वाली पीढ़ियों को संस्कृति और मूल्यों से जोड़ने का कार्य करेगा। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि महावीर जयंती जैन समाज का सबसे बड़ा उत्सव है और इस अवसर पर इस भव्य म्यूज़ियम का उद्घाटन एक ऐतिहासिक घटना है। उन्होंने बताया कि यहाँ जैन तीर्थंकरों की सुंदर प्रतिमाएँ, वेद-पुराण, आयुर्वेद और हजारों वर्षों की पांडुलिपियाँ एक साथ प्रदर्शित हैं, जो आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आचार्य पद्मसागर सूरिश्वरजी महाराज के दशकों के प्रयासों से यह विरासत साकार हुई है और यह संस्कृति संरक्षण का एक महान यज्ञ है। यह म्यूज़ियम युवाओं को तकनीक के साथ संस्कार जोड़ने की प्रेरणा देगा। इस अवसर पर आचार्य पद्मसागर सूरिश्वरजी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत अपने गौरवशाली अतीत को वर्तमान में परिवर्तित कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व, निष्ठा और दूरदर्शिता की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने देश के विकास और सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। महावीर जैन आराधना केंद्र के अध्यक्ष एवं टोरेंट ग्रुप के चेयरमैन सुधीर मेहता ने स्वागत भाषण में कहा कि भगवान महावीर का ‘जीओ और जीने दो’ का संदेश आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने बताया कि पिछले 10-12 वर्षों में 400 से अधिक दुर्लभ प्राचीन मूर्तियाँ विदेशों से वापस लाई गई हैं। यह म्यूज़ियम केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि लगभग 3 लाख से अधिक पांडुलिपियों का विशाल सांस्कृतिक खजाना है। इस अवसर पर जैन संत-साध्वी, श्रावक-श्राविकाएँ, समाज के गणमान्य व्यक्ति एवं जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सतीश/31 मार्च