तेलअवीव,(ईएमएस)। इजराइल की संसद ने हाल ही में एक नया कानून पारित किया है, इसके तहत आतंकी घटनाओं के आरोपी फिलिस्तीनियों को सीधे मौत की सजा मिलेगी। इस कानून के अनुसार दोषी साबित होने के 90 दिनों के भीतर फांसी दी जाएगी, हालांकि कुछ खास परिस्थितियों में 180 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है। यह कानून वेस्ट बैंक में इज़रायली नागरिकों पर जानलेवा हमलों के लिए दोषी पाए गए फिलिस्तीनियों पर लागू होगा और पुराने मामलों पर प्रभाव नहीं डालेगा। कानून के अनुसार, इज़राइल की अदालतों को अब अपने नागरिकों की हत्या या नुकसान पहुँचाने वाले आरोपियों को मौत की सजा या उम्रकैद देने का अधिकार होगा। कुछ मामलों में विशेष परिस्थितियों में उम्रकैद की सजा दी जा सकती है। वेस्ट बैंक में मामलों की सुनवाई मिलिट्री कोर्ट में होगी। इस कदम को इज़राइल के धुर दक्षिणपंथी दलों और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने समर्थन दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस कानून को लेकर विरोध और समर्थन दोनों सामने आए हैं। यूरोपीय परिषद ने चिंता जताकर कहा कि एक ही अपराध के लिए अलग-अलग व्यक्तियों को अलग-अलग सजा नहीं दी जा सकती। वहीं, अमेरिका ने कानून का समर्थन करते हुए कहा कि एक संप्रभु राष्ट्र के तौर पर इज़राइल को आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का अधिकार है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी भरोसा जताया कि इज़राइल हर मामले की कोर्ट में सुनवाई करके ही सजा तय करेगा और मानवाधिकारों की रक्षा की जाएगी। नए कानून के तहत, अगर कोई जानबूझकर किसी इज़रायली नागरिक की हत्या या नुकसान पहुँचाने का प्रयास करता है, तो उसे मौत की सजा या उम्रकैद दी जाएगी। फांसी का अर्थ दोषी को लटकाना है। यह कानून इज़राइलियों, फिलिस्तीनियों और पूर्वी येरुशलम में रहने वाले लोगों से जुड़े मामलों पर लागू होगा। इस विधेयक का उद्देश्य आतंकवाद से निपटना और इज़राइल की सुरक्षा को सुनिश्चित करना बताया गया है। कुल मिलाकर, यह नया कानून इज़राइल में सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयास का हिस्सा है, लेकिन इसके अंतरराष्ट्रीय मानवीय और राजनीतिक प्रभाव पर अभी बहस जारी है। आशीष दुबे / 31 मार्च 2026