कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु की अपील खारिज जबलपुर, (ईएमएस)। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय की अपील खारिज करते हुए कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि “यह कैसे संभव है कि कोई उम्मीदवार सूचना मिलते ही 450 किलोमीटर दूर गुना से उसी दिन इंटरव्यू देने पहुंच जाए। युगलपीठ ने एकलपीठ के आदेश को सही ठहराते हुए अपील में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। यह है मामला.............. कृषि विवि के कुलपति की ओर से दायर अपील में गुना निवासी सुरेन्द्र कुमार शाक्य के पक्ष में दिए गए आदेश को चुनौती दी गई थी। सुरेन्द्र ने 2017 में ड्राइवर पद के लिए आवेदन किया था। इंटरव्यू 23 जून 2018 को होना था। उसको इंटरव्यू की सूचना उसी दिन सुबह 9 बजे मिली। 450 किमी दूर से समय पर पहुंचना संभव नहीं था। इंटरव्यू से वंचित होने पर सुरेन्द्र ने वर्ष 2018 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जुर्माना के बाद भी दाखिल नहीं किया जवाब....... हाईकोर्ट की एकलपीठ ने इस बात को गंभीर माना कि 2018 से 2025 तक विश्वविद्यालय ने जवाब ही दाखिल नहीं किया। 20 अक्टूबर 2025 को फैसला सुनाते हुए जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने विश्विद्यालय पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए सुरेंद्र कुमार शाक्य के लिए दोबारा इंटरव्यू कराने का आदेश दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि जरूरत पड़ने पर सुपरन्यूमेरेरी (अतिरिक्त) पद बनाया जाए। सिंगल बेंच की इसी फैसले को चुनौती देकर यह अपील कृषि विश्विद्यालय के कुलपति की और से दाखिल की गई थी। दलील खारिज......... यूनिवर्सिटी की ओर से कहा गया कि इंटरव्यू की जानकारी वेबसाइट पर थी, इसलिए उम्मीदवार की जिम्मेदारी थी कि वह अपडेट चेक करता रहे। इस दलील को सिरे से ख़ारिज करते हुए डिवीज़न बेंच ने साफ कहा कि “किसी भी उम्मीदवार से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह लगातार वेबसाइट चेक करता रहे।” इस टिप्पणी के साथ डिवीज़न बेंच ने एकलपीठ के आदेश को वैध ठहराते हुए अपील खारिज कर दी। सुनील साहू / मोनिका / 31 मार्च 2026/ 6.07