:: अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल बने अध्यक्ष; 30 दिनों में सरकार को सौंपनी होगी रिपोर्ट :: भोपाल/इंदौर (ईएमएस)। मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश में लागू दशकों पुराने और जटिल श्रम कानूनों को सरल व समेकित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य शासन ने वर्तमान में प्रचलित विभिन्न श्रम विधियों का सूक्ष्म अध्ययन कर एक एकीकृत श्रम संहिता (Labor Code) का मसौदा तैयार करने के लिए अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह समिति अगले 30 दिनों के भीतर अपना विस्तृत प्रारूप प्रस्तुत करेगी। समिति का मुख्य उद्देश्य भारत सरकार द्वारा लाई गई चार नवीन श्रम संहिताओं के साथ राज्य के कानूनों का संरेखीकरण (Alignment) करना है। बदलती हुई वैश्विक अर्थव्यवस्था, औद्योगिक आवश्यकताओं और तकनीकी विकास के दौर में पुराने कानूनों में आवश्यक सुधार कर उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाना शासन की प्राथमिकता है। इस कदम से न केवल उद्योगों के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि श्रमिकों के हितों का भी आधुनिक परिवेश में संरक्षण सुनिश्चित हो सकेगा। :: समिति में अनुभवी अधिकारियों का समावेश :: राज्य शासन द्वारा गठित इस विशेषज्ञ समिति में प्रशासनिक और कानूनी बारीकियों को समझने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है: अध्यक्ष : अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव (लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा)। सदस्य : मनीष रस्तोगी (अपर मुख्य सचिव, वित्त), मुकेश कुमार (सचिव, विधि विभाग) और प्रियंक मिश्रा (कलेक्टर, धार)। सदस्य-सचिव : रघुराज राजेन्द्रन (सचिव, श्रम विभाग)। :: तकनीकी विकास और अर्थव्यवस्था पर फोकस :: समिति 5 प्रमुख श्रम विधियों का गहराई से अध्ययन करेगी और उन्हें समेकित कर एक मसौदा तैयार करेगी। आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि नवीन संहिता में तकनीकी प्रगति और आर्थिक बदलावों के दृष्टिगत समुचित प्रावधानों का समावेश किया जाए। इससे राज्य में औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने के लिए एक पारदर्शी और सुदृढ़ विधिक ढांचा तैयार होगा। 30 दिनों के भीतर प्राप्त होने वाले इस प्रारूप के आधार पर राज्य सरकार आगामी विधायी कार्यवाही सुनिश्चित करेगी। प्रकाश/31 मार्च 2025