-सरकार को कोर्ट से झटका, नई नीति तक 3 प्रतिशत अतिरिक्त अंक देने का आदेश जोधपुर,(ईएमएस)। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मख्यपीठ ने किन्नर (ट्रांसजेंडर) समुदाय को ओबीसी सूची में शामिल करने के राज्य सरकार के फैसले पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे “महज दिखावा” और “आंखों में धूल झोंकना” करार दिया है। जस्टिस अरुण मोंगा और योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने 12 जनवरी 2023 की उस अधिसूचना पर सवाल उठाए, जिसमें किन्नर समुदाय को ओबीसी सूची में क्रमांक 92 पर शामिल किया गया था। अदालत ने अपने रिपोर्टेबल फैसले में स्पष्ट निर्देश दिया कि जब तक राज्य सरकार इस विषय पर स्पष्ट और समुचित आरक्षण नीति नहीं बनाती, तब तक किन्नर समुदाय के अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए 3 प्रतिशत अतिरिक्त अंक (एडिशनल वेटेज) दिया जाए। यह मामला जालोर जिले की रानीवाड़ा तहसील की निवासी गंगा कुमारी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने पहले वर्ष 2021 में 1प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की मांग को लेकर याचिका दायर की थी। इस पर अदालत ने 14 फरवरी 2022 को नाल्सा जजमेंट के तहत उचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। आदेश का पालन न होने पर अवमानना याचिका दायर की गई। हालांकि, बाद में राज्य सरकार द्वारा 2023 में अधिसूचना जारी किए जाने के बाद अवमानना याचिका खारिज हो गई। इसके बाद याचिकाकर्ता ने 2024 में नई याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह अहम फैसला सुनाया। नीति बनाने की जरूरत पर जोर राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि केवल ओबीसी सूची में शामिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किन्नर समुदाय के लिए स्पष्ट और प्रभावी आरक्षण नीति बनाना आवश्यक है, ताकि उन्हें वास्तविक लाभ मिल सके। इस फैसले को ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो भविष्य में नीतिगत बदलाव का आधार बन सकता है। हिदायत/ईएमएस 31मार्च26