-मासिक भरण-पोषण के लिए पत्नी-बेटी को 30 हजार प्रतिमाह और 10 लाख की एफडी का आदेश जयपुर,(ईएमएस)। राजस्थान हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवाद से जुड़े एक अहम मामले में ससुराल पक्ष को सशर्त राहत देते हुए उनके विदेश जाने पर रोक लगा दी है। साथ ही अदालत ने पीड़ित महिला और उसकी दो वर्षीय बेटी के लिए प्रति माह 30 हजार रुपए भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। यह आदेश जस्टिस समीर जैन की अदालत ने सास-ससुर, ननद और देवर की अग्रिम जमानत याचिका का निस्तारण करते हुए जारी किया। संबंधित लोगों के खिलाफ महिला ने खैरथल महिला थाने में प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया था। सुनवाई के दौरान पीड़ित महिला ने अदालत को बताया कि उसकी शादी 17 जनवरी 2022 को हुई थी और उसके बाद एक बेटी का जन्म हुआ, जिसकी उम्र अब दो साल है। महिला का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही उसका पति अमेरिका चला गया और वहां दूसरी शादी कर ली। उसने यह भी आशंका जताई कि पति अपने परिवार को भी विदेश बुलाने की कोशिश कर रहा है, जिससे उसके और उसकी बेटी के जीवनयापन पर गंभीर संकट आ सकता है। कोर्ट ने तय की शर्तें अदालत ने दोनों पक्षों के बीच सहमति के आधार पर निर्देश दिया कि ससुराल पक्ष अप्रैल से हर महीने की 2 तारीख तक महिला के खाते में 30 हजार रुपए जमा कराएगा। इसके अलावा, अदालत ने नाबालिग बच्ची के नाम 10 लाख रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) कराने का आदेश दिया, जिसे बिना न्यायालय की अनुमति के नहीं निकाला जा सकेगा। जांच में सहयोग और यात्रा पर रोक कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ससुराल पक्ष के सभी सदस्य जांच अधिकारी के बुलावे पर उपस्थित होंगे और बिना अदालत की अनुमति के देश छोड़कर विदेश नहीं जा सकेंगे। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामला वैवाहिक विवाद से जुड़ा है, इसलिए इसमें मध्यस्थता और सौहार्दपूर्ण समाधान को प्राथमिकता दी गई है। हिदायत/ईएमएस 31मार्च26