राज्य
31-Mar-2026
...


:: सालाना 75 लाख रू. की बचत; पूर्व इसरो चीफ डॉ. सिवन ने किया स्मार्ट एनर्जी और हाइ-टेक रिसर्च का आगाज़ :: इन्दौर (ईएमएस)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर ने भविष्य की चुनौतियों को भांपते हुए स्थायी विकास और अत्याधुनिक अनुसंधान की दिशा में एक नई इबारत लिख दी है। संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख डॉ. के. सिवन ने कैंपस में एक मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र की आधारशिला रखी। 3.15 एकड़ के विशाल भूखंड पर तैयार होने वाला यह प्लांट न केवल संस्थान के कार्बन फुटप्रिंट को कम करेगा, बल्कि बिजली बिल में प्रति वर्ष लगभग 75 लाख रूपये की भारी-भरकम बचत भी सुनिश्चित करेगा। इस भव्य समारोह के दौरान डॉ. सिवन ने 11.8 करोड़ रूपये की भारी लागत से निर्मित एक आधुनिक अनुसंधान परिसर का भी उद्घाटन किया। 1,662 वर्ग फुट में फैली इन 10 अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में न केवल विश्वस्तरीय वैज्ञानिक शोध होंगे, बल्कि यहाँ शोधार्थियों को भविष्य की जटिल समस्याओं के समाधान खोजने के लिए एक स्मार्ट ईकोसिस्टम मिलेगा। इसके साथ ही, कैंपस में ही बनने वाले केंद्रीय विद्यालय भवन का शिलान्यास कर संस्थान ने शिक्षा के बुनियादी ढांचे को एक नई ऊँचाई प्रदान की है। यह पूरी पहल इंडिया नेट जीरो फोरम 2026 के उन लक्ष्यों को समर्पित है, जो भारत को टिकाऊ ऊर्जा के वैश्विक मानचित्र पर सबसे आगे देखना चाहते हैं। डॉ. सिवन ने इस अवसर पर उत्साह भरते हुए कहा कि आज की प्रतिस्पर्धा जटिल तकनीकों को सरल और किफायती बनाने की है। आईआईटी इंदौर की ये परियोजनाएं पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक क्रांति के उस संगम का बेहतरीन उदाहरण हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए शोध के नए क्षितिज खोलेंगी। यह कदम न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सहायक होगा, बल्कि संस्थान को आर्थिक और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बनाएगा। प्रकाश/31 मार्च 2026