वाशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिका कभी किसी का सगा नहीं रहा। उसने ईरान जंग से पहले अरब देशों का जमकर दोहन किया। जहां जैसा आर्थिक मुनाफा कमा सकता था कमाया। अब, जब परिस्थितयां विपरीत होने लगीं तो उन्हीं देशों से जंग का खर्चा वसूलने के लिए प्लान बनाने लगा। ताजा घटनाक्रमों से संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका इस संकट को सुलझाने के लिए दोहरी रणनीति पर काम कर रहा है। एक ओर जहाँ अमेरिका ने ईरान पर सैन्य दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से खाड़ी क्षेत्र में अपने मरीन कमांडोज़ की तैनाती की है, वहीं दूसरी ओर वह पाकिस्तान और कुछ प्रभावशाली खाड़ी देशों के माध्यम से तेहरान के साथ गोपनीय कूटनीतिक बातचीत में भी जुटा हुआ है। इस बीच, व्हाइट हाउस ने एक बड़ा संकेत देते हुए कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस युद्ध के भारी-भरकम आर्थिक बोझ को अरब देशों के साथ साझा करने या उन पर डालने की योजना बना रहे हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप के मन में यह विचार प्रमुखता से है कि इस क्षेत्रीय सुरक्षा अभियान का वित्तीय दायित्व उन देशों को भी उठाना चाहिए जिन्हें सीधे तौर पर इसका लाभ मिल रहा है। हालांकि अभी तक इस पर कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है, लेकिन ट्रंप प्रशासन इस दिशा में गंभीरता से रुचि दिखा रहा है। लेविट ने यह भी दावा किया कि सार्वजनिक रूप से सख्त और कड़वी बयानबाजी के बावजूद, पर्दे के पीछे ईरान निजी तौर पर बातचीत के लिए तैयार नजर आ रहा है और यह संवाद सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है। दूसरी तरफ, कूटनीति के साथ-साथ चेतावनियों का सिलसिला भी जारी है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तेहरान जल्द ही किसी ठोस समझौते पर सहमत नहीं होता, तो अमेरिका उसकी तेल रिफायनरियों और डीसैलिनेशन प्लांट्स (खारे पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्रों) को निशाना बना सकता है। यह धमकी ऐसे समय में आई है जब ईरान ने अमेरिका के मौजूदा शांति प्रस्तावों को अवास्तविक बताकर खारिज कर दिया है और इजरायल पर अपने मिसाइल हमलों की तीव्रता बढ़ा दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी जवाबी रुख अपनाते हुए सऊदी अरब से अपील की है कि वह अपने यहाँ तैनात अमेरिकी सैनिकों को हटा दे, क्योंकि ईरान सऊदी अरब को एक भाईचारा रखने वाला देश मानता है और क्षेत्रीय शांति के लिए बाहरी दखल का अंत जरूरी है। वीरेंद्र/ईएमएस 01 अप्रैल 2026