ज़रा हटके
01-Apr-2026
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-बैलिस्टिक मिसाइलों और शाहेद ड्रोनों का ब्लूप्रिंट होता है तैयार, घबरा रहे अमेरिका-इजराइल तेहरान,(ईएमएस)। ईरान के दिल इस्फ़हान में बसा एक ऐसा संस्थान जिसे दुनिया ईरान का मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉज (एमआईटी) कहती है आज बारूद के धुएं और मिसाइलों की गूंज के बीच खड़ा हुआ है। इस्फ़हान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (आईयूटी) महज एक शिक्षण संस्थान नहीं बल्कि वह शातिर दिमाग है जिसने पश्चिम की नींद उड़ा दी है। अमेरिका-इजराइल का मानना है कि इस यूनिवर्सिटी की प्रयोगशालाओं में केवल डिग्रियां नहीं बंटतीं बल्कि यहीं से ईरान की उन घातक बैलिस्टिक मिसाइलों और शाहेद ड्रोनों का ब्लूप्रिंट तैयार होता है जो आज सिरदर्द बना हुआ है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 1974 में जब इसकी नींव रखी गई, तो इसे अमेरिकी तकनीकी शिक्षा की तर्ज पर ईरान को आधुनिक बनाने के लिए बनाया गया था, लेकिन समय बदला और आज यही ‘ज्ञान का मंदिर’ ईरान के सैन्य-औद्योगिक परिसर का सबसे मजबूत स्तंभ बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु ऊर्जा से लेकर अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों तक ईरान जो भी ‘स्वदेशी’ होने की बात करता है, उसकी जड़ें इसी यूनिवर्सिटी के रिसर्च संस्थानों की देन हैं। यही वजह है कि जब इजराइली और अमेरिकी लड़ाकू विमान आसमान में गरजते हैं, तो उनके निशाने पर अक्सर इस यूनिवर्सिटी के वह ‘रिसर्च सेंटर’ होते हैं जहां ईरान की अगली पीढ़ी के महाविनाशक हथियार तैयार हो रहे होते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका-इजराइल का मानना है कि यह केवल एक यूनिवर्सिटी नहीं बल्कि ईरान के मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स का दिमाग है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस यूनिवर्सिटी के शोध संस्थानों का सीधा संबंध ईरान के रक्षा मंत्रालय से है। ईरान के घातक शाहेद ड्रोन और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के मार्गदर्शन और प्रोपल्शन सिस्टम की डिजाइनिंग में यहां के प्रोफेसरों और छात्रों की बड़ी भूमिका मानी जाती है। इस्फ़हान शहर ईरान के परमाणु कार्यक्रम का दिल है। यूनिवर्सिटी के पास ही ईरान का सबसे बड़ा परमाणु अनुसंधान केंद्र और यूरेनियम कन्वर्जन प्लांट स्थित है। पश्चिमी देशों को शक है कि यूनिवर्सिटी के लैब का इस्तेमाल गोपनीय परमाणु रिसर्च और सेंट्रीफ्यूज तकनीक विकसित करने में किया जाता है। यूनिवर्सिटी कार्बन फाइबर और विशेष मिश्र धातुओं पर शोध करती है जो मिसाइल की बॉडी और परमाणु रिएक्टरों के लिए अनिवार्य है। आईयूटी के ‘इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड रिसर्च’ और ‘मैकेनिकल इंजीनियरिंग’ विभाग ईरान के डिफेंस प्रोजेक्ट्स के लिए थिंक-टैंक का काम करते हैं। यहां से निकले इंजीनियर्स ही ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ के मिसाइल प्रोग्राम को लीड कर रहे हैं। यह यूनिवर्सिटी ‘न्यूक्लियर इंजीनियरिंग’ में ईरान के सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञों को तैयार करती है। यहां की लैब में होने वाले ‘हाइब्रिड रिसर्च’ का इस्तेमाल यूरेनियम संवर्धन की प्रक्रिया को तेज करने में किया जाता रहा है। रविवार को हुए हमले में यूनिवर्सिटी के एक अनुसंधान संस्थान को निशाना बनाया गया जिसमें चार कर्मचारी घायल हो गए। इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी-इजराइली विश्वविद्यालयों को वैध लक्ष्य घोषित कर दिया है जिससे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। सिराज/ईएमएस 01 अप्रैल 2026