राष्ट्रीय
01-Apr-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। दांतों और मसूड़ों की खराब सेहत का असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य और दिमाग पर भी पड़ता है। खराब ओरल हेल्थ सिर्फ मुंह की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर को प्रभावित कर सकती है। जब दांतों में सड़न, मसूड़ों में सूजन या संक्रमण होता है, तो लगातार दर्द बना रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दांतों और मसूडों का यह दर्द न केवल खाने-पीने में परेशानी पैदा करता है, बल्कि नींद पर भी असर डालता है। नींद पूरी न होने और लगातार दर्द की स्थिति में व्यक्ति चिड़चिड़ा हो सकता है और धीरे-धीरे तनाव तथा चिंता जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। इस तरह दांतों की समस्या सीधे मानसिक स्थिति को प्रभावित करती है। इसके अलावा, दांतों का पीला होना, टूटना या मुंह से बदबू आना व्यक्ति के आत्मविश्वास को भी कम कर देता है। कई लोग ऐसी स्थिति में दूसरों के सामने खुलकर बात करने से बचने लगते हैं और हंसने में भी झिझक महसूस करते हैं। इसका असर उनके सामाजिक व्यवहार पर पड़ता है और वे धीरे-धीरे लोगों से दूरी बनाने लगते हैं, जिससे अकेलेपन की भावना बढ़ सकती है। एक और महत्वपूर्ण पहलू मुंह में पनपने वाले बैक्टीरिया हैं। यदि सही तरीके से सफाई नहीं की जाए, तो हानिकारक बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं। ये बैक्टीरिया खून के जरिए शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंच सकते हैं, जिनमें दिमाग भी शामिल है। कुछ शोधों में यह संकेत मिला है कि खराब ओरल हेल्थ का संबंध याददाश्त कमजोर होने और अन्य संज्ञानात्मक समस्याओं से भी हो सकता है। सामाजिक जीवन पर भी इसका स्पष्ट प्रभाव देखा जाता है। मुंह की बदबू या दांतों की खराब स्थिति के कारण लोग सार्वजनिक स्थानों, बैठकों और सामाजिक आयोजनों से दूरी बनाने लगते हैं। यह स्थिति मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकती है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि इन समस्याओं से बचाव बहुत आसान है। रोजाना कम से कम दो बार ब्रश करना, खासकर रात में सोने से पहले, फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का उपयोग करना, मीठी चीजों का सीमित सेवन और नियमित रूप से दंत चिकित्सक से जांच कराना ये सभी छोटे कदम बड़ी समस्याओं से बचा सकते हैं। सुदामा/ईएमएस 01 अप्रैल 2026