राष्ट्रीय
01-Apr-2026
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- सौदा नौ लाख रुपये में तय हुआ लेकिन मिले केवल साढ़े तीन लाख - पीड़ित छात्र खुद भी साइबर अपराधों से जुड़ा रहा देहरादून,(ईएमएस)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में एमबीए चतुर्थ सेमेस्टर की पढ़ाई कर रहे एक छात्र द्वारा अपनी फीस जमा करने के लिए किडनी बेचने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला आयुष कुमार नामक यह छात्र उस समय पुलिस की नजरों में आया जब किडनी निकालने के बाद सौदा करने वाले गिरोह ने उसे पूरी रकम नहीं दी और वह अपनी शेष राशि मांगने पुलिस के पास पहुंच गया। छात्र ने पुलिस को बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने और पिता की आत्महत्या के बाद पढ़ाई छूटने के डर से उसने यह घातक कदम उठाया। छात्र के मुताबिक, शुरुआत में सौदा नौ लाख रुपये में तय हुआ था, लेकिन ऑपरेशन के बाद आरोपियों ने केवल साढ़े तीन लाख रुपये ही दिए। जांच में सामने आया है कि आयुष करीब छह महीने पहले टेलीग्राम पर एक किडनी डोनर ग्रुप के संपर्क में आया था। वह पहले शिक्षा ऋण (लोन) लेकर फीस भरना चाहता था, लेकिन सफलता न मिलने पर उसने किडनी बेचने का निर्णय लिया। उसे डॉक्टर अफजल और डॉक्टर वैभव कानपुर लेकर आए थे, जहां उसका ऑपरेशन किया गया। हालांकि, पुलिस की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि पीड़ित छात्र खुद भी साइबर अपराधों से जुड़ा रहा है और उसने कई फर्जी म्यूल अकाउंट बनवाए थे, जिसकी जांच की जा रही है। इस मामले की गहराई से पड़ताल करने पर पुलिस ने एक बड़े अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश किया है। कानपुर पुलिस ने इस सिलसिले में आईएमए की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा समेत पांच डॉक्टरों और एक दलाल को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान लखनऊ और नोएडा के कई बड़े अस्पताल भी पुलिस के रडार पर आ गए हैं, जहां गंभीर स्थिति होने पर मरीजों को अवैध रूप से शिफ्ट किया जाता था। एसीपी आशुतोष कुमार के अनुसार, इन अस्पतालों की भूमिका संदिग्ध है और जल्द ही कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं। फिलहाल पुलिस फरार चल रहे दो अन्य डॉक्टरों और चार सहयोगियों की तलाश में जुटी है, जो इस अवैध मानव अंग व्यापार के नेटवर्क को संचालित कर रहे थे।