अंतर्राष्ट्रीय
01-Apr-2026
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दुबई,(ईएमएस)। ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने एक ऐसा चौंकाने वाला बयान दिया है, जिसने वैश्विक भू-राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। अब तक मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे यूएई ने इस संघर्ष में सीधे शामिल होने की स्पष्ट मंशा जता दी है। यूएई ने घोषणा की है कि वह सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बलपूर्वक फिर से खोलने की योजना पर काम कर रहा है और इसके लिए वह दुनिया की प्रमुख सैन्य शक्तियों का सहयोग चाहता है। जानकारी के अनुसार, यूएई इस सैन्य अभियान को अंतरराष्ट्रीय वैधता दिलाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक औपचारिक प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। यूएई ने न केवल अमेरिका, बल्कि यूरोप और एशिया की प्रमुख सैन्य शक्तियों से भी इस मिशन में शामिल होने का पुरजोर आग्रह किया है। यदि यूएई इस युद्ध में सीधे तौर पर कदम रखता है, तो वह खाड़ी क्षेत्र का पहला ऐसा देश बन जाएगा जो औपचारिक रूप से इस संघर्ष का हिस्सा बनेगा। यूएई को उम्मीद है कि यदि सुरक्षा परिषद से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो कई अन्य देश भी इस गठबंधन का हिस्सा बनेंगे। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और चीन द्वारा वीटो किए जाने की संभावना के कारण इस प्रस्ताव का पारित होना कठिन हो सकता है। इसके बावजूद, खाड़ी देशों के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यूएई बिना किसी औपचारिक वैश्विक मंजूरी के भी सैन्य सहयोग देने के लिए पूरी तरह तैयार है। यूएई की इस आक्रामक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा क्षेत्रीय द्वीपों पर नियंत्रण से भी जुड़ा है। उसने सुझाव दिया है कि अमेरिका को अबू मूसा जैसे उन रणनीतिक द्वीपों पर नियंत्रण करना चाहिए, जो दशकों से ईरान के कब्जे में हैं, लेकिन जिन पर यूएई अपना संप्रभु दावा करता है। यूएई के विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच इस बात पर पूर्ण सहमति है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखना अनिवार्य है। वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए यह जलमार्ग जीवनरेखा के समान है और यहां किसी भी प्रकार का अवरोध पूरी विश्व अर्थव्यवस्था को संकट में डाल सकता है। उल्लेखनीय है कि युद्ध शुरू होने से पहले तक यूएई तनाव कम करने की कोशिशों में जुटा था, लेकिन अब उसने अपना रुख पूरी तरह बदल लिया है। यूएई के साथ-साथ सऊदी अरब और बहरीन जैसे देश भी अब ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपना रहे हैं। बहरीन, जहां अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है, यूएई के इस प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन कर रहा है। यदि यह सैन्य गठबंधन आकार लेता है, तो आने वाले समय में खाड़ी क्षेत्र के समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/01अप्रैल 2026 -----------------------------------