राज्य
01-Apr-2026


आपराधिक अवमानना के मामले में इंदौर के वकील को हाईकोर्ट की नसीहत जबलपुर, (ईएमएस)। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायाधीश विनय सराफ की संयुक्तपीठ ने इंदौर में मजिस्ट्रेट से एक वकील द्वारा अभद्रता किए जाने के आरोपों को गंभीरता से लिया है। मामले में सुनवाई के दौरान संयुक्तपीठ ने संबंधित अधिवक्ता से कहा कि “आप पहले जवाब दीजिए और जवाब दाखिल करने से पहले किसी सीनियर को जरूर दिखाना।” न्यायालय ने यह भी कहा कि वकील अपने सभी तर्क लिखित जवाब में पेश करें। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई तिथि 28 अप्रैल नियत करते हुए वकील को उक्त तिथि पर पुन: न्यायालय के समक्ष में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। प्रकरण के मुताबिक इंदौर के अधिवक्ता मधुर तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने 18 दिसंबर 2025 को एक मुकदमे की पेशी के दौरान न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी मृणाल मोहित के साथ अभद्रता और धमकी दी। उक्त घटना के बाद वकील मधुर तिवारी के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई के लिए मामला उच्च न्यायालय भेजा गया। मामले पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अधिवक्ता मधुर तिवारी कोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह गलत और दुर्भावनापूर्ण बताया। इस पर मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली संयुक्तपीठ ने मौखिक बहस की बजाय लिखित जवाब देने पर जोर दिया। न्यायालय ने साफ़ कहि कि हमे इस बात से बिलकुल भी सरोकार नहीं है कि निचली अदालत में आपका मुकदमा क्या था। हमे इस बात से सरोकार है कि वहां पर आपका रवैया कैसा रहा। अपनी दलील में वकील मधुर तिवारी ने यह भी दावा किया कि अदालत में लगे सीसीटीवी के फुटेज बुलाकर सच्चाई का पता लगाया जा सकता है। उसने दावा किया कि यदि मैं गलत साबित हुआ तो कोई भी सजा भुगतने तैयार हूँ। उसने यह भी दावा किया कि सम्बंधित जज के खिलाफ उसने आपको (मुख्य न्यायाधीश को) और सीजेआई को शिकायत भेजी थी, इसी वजह से मुझपर यह कार्रवाई बदले की भावना से की जा रही है। मामले पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने बैंड और गाउन पहनकर वकील के न्यायालय में पेश होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अवमानना मामलों में ऐसा ड्रेस कोड उपयुक्त नहीं है। जब वे बैंड उतारने लगे, तो बेंच ने उन्हें रोकते हुए समझाइश दी। संयुक्तपीठ ने पूछा कि आप कितने साल से प्रैक्टिस कर रहे हैं? इस पर वकील ने 5 साल से वकालत करने की जानकारी न्यायालय को दी। इस पर संयुक्तपीठ ने पूछा कि क्या उन्होंने किसी सीनियर के अधीन काम किया है? वकील ने बताया कि उन्होंने सीधे प्रैक्टिस शुरू की। न्यायालय ने इसके बाद उन्हें कहा कि वे अपना जवाब लिखित में देकर अपनी बात रखें, लेकिन जवाब दाखिल करने से पहले किसी सीनियर से मार्गदर्शन जरूर लें। अजय पाठक / मोनिका / 01 अप्रैल 2026/ 2.41