राष्ट्रीय
02-Apr-2026


नई दिल्‍ली (ईएमएस)। जंग के बीच देश में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार उच्चस्तरीय स्तर पर लगातार समीक्षा कर रही है। इस सिलसिले में गुरुवार को रूस के प्रतिनिधिमंडल के साथ रसायन एवं उर्वरक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई, इसमें चर्चा हुई कि रूस भारत को अतिरिक्त उर्वरक की सप्लाई कितनी बढ़ा सकता है। मोदी सरकार केवल रूस ही नहीं बल्कि मौरक्को सहित अन्य देशों के साथ चर्चा कर रही है, जिससे उर्वरक आयात के विकल्पों और बेहतर कर सके। साथ ही सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अलावा अन्य समुद्री मार्गों से भी उर्वरक लाने की संभावनाओं को तलाश किया जाए। इस बीच केंद्र सरकार ने किसानों और बाजार को भरोसा दिलाया है कि देश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। हाल ही लोकसभा में भी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि देश में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध है और घबराने की जरूरत नहीं है। उर्वरक विभाग भी हाल ही में आंकड़े जारी कर यह समझाने की कोशिश कर चुका है कि देश में स्टॉक पर्याप्त है। दरअसल भारत में उर्वरकों की खरीद का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स के तहत होता है, जबकि करीब 10 प्रतिशत खरीद शॉर्ट टर्म के आधार पर होती है। सूत्रों के अनुसार ईरान की ओर से भी अनौपचारिक रूप से भारत को उर्वरक लेने का प्रस्ताव मिला है। हालांकि शॉर्ट टर्म खरीद में आमतौर पर कीमतें ज्यादा चुकानी पड़ती हैं, इसलिए सरकार सप्लाई और कीमत दोनों को संतुलित रखने की रणनीति पर काम कर रही है। साथ ही, सऊदी अरब से डीएपी की सप्लाई भी तय की गई है, इसके तहत अगले पांच साल के लिए हर साल 31.10 लाख टन की आपूर्ति होगी। इसके अलावा ओमान की कंपनी ने हर साल 10 लाख टन यूरिया देने की पेशकश की है, जबकि सऊदी अरब ने अक्टूबर 2026 तक 7 लाख टन यूरिया की अतिरिक्त सप्लाई देने का प्रस्ताव रखा है। आशीष दुबे / 02 अप्रैल 2026