राष्ट्रीय
02-Apr-2026
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:: बड़ी कार्रवाई : डिजिटल वॉलेट में आए 129 करोड़ लौटाने से किया इनकार, पुलिस जांच में जुटी :: इंदौर (ईएमएस)। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के डिजिटल वॉलेट में तकनीकी गड़बड़ी का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये हड़पने वाले सात जालसाजों के खिलाफ शिप्रा पुलिस ने धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया है। इंदौर के रहने वाले इन सात ग्राहकों ने कंपनी के खाते से गलत तरीके से आए 5.7 करोड़ रुपये बार-बार नोटिस देने के बावजूद नहीं लौटाए। पुलिस अब इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए 129.55 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है। उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) उमाकांत चौधरी ने बताया कि बीपीसीएल के एक अधिकारी की शिकायत पर आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामला बीपीसीएल की स्मार्ट फ्लीट योजना से जुड़ा है, जिसके माध्यम से ट्रांसपोर्टर और ट्रक मालिक ओटीटी-आधारित वर्चुअल कार्ड का उपयोग करके देशभर में ईंधन खरीदते हैं। :: डाटा एनालिसिस में हुआ बड़ा खुलासा :: कंपनी द्वारा मार्च 2023 में किए गए डाटा एनालिसिस में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि देशभर के 1,093 ग्राहकों के डिजिटल वॉलेट में कुल 129.55 करोड़ रुपये का रिचार्ज बिना किसी भुगतान के स्वतः ही हो गया था। तकनीकी खामी का पता चलते ही कंपनी ने तत्काल इन सभी ग्राहकों के स्मार्ट फ्लीट खातों को ब्लॉक कर दिया। जांच में सामने आया कि इंदौर के सात ग्राहकों के खातों में भी 5.7 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हुई थी। :: इन सात लोगों पर दर्ज हुई एफआईआर :: पुलिस के अनुसार, धोखाधड़ी के इस मामले में इंदौर निवासी विशाल सिंह, शशि सिंह, दलवीर सिंह, बलजिंदर सिंह, वाहिद खान, नरेंद्र सिंह बसु और बलबीर सिंह को आरोपी बनाया गया है। कंपनी ने इन सभी को लिखित सूचना देकर गलत तरीके से आए पैसे वापस करने का आग्रह किया था, लेकिन इन्होंने राशि लौटाने से स्पष्ट इनकार कर दिया। इसके बाद कंपनी ने कानूनी रास्ता अपनाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। :: तकनीकी खामी या साजिश? जांच जारी :: डीएसपी चौधरी ने बताया कि एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पुलिस अब यह पता लगा रही है कि आखिर एक साथ 1,000 से अधिक ग्राहकों के वॉलेट में इतनी बड़ी राशि कैसे और किन परिस्थितियों में रिचार्ज हुई। पुलिस विशेषज्ञों की मदद से यह भी जांच रही है कि यह किसी सॉफ्टवेयर की तकनीकी खराबी थी या फिर इसके पीछे किसी बड़े गिरोह की सुनियोजित साजिश। फिलहाल आरोपियों की तलाश की जा रही है और जल्द ही उनसे पूछताछ की जाएगी। प्रकाश/02 अप्रैल 2026