राज्य
02-Apr-2026
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:: ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में सेमिनार आयोजित, पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण और आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर :: इंदौर (ईएमएस)। वर्तमान दौर में मानव दुर्व्यापार (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) जैसे संवेदनशील अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस और समाज को मिलकर एक अभेद्य दीवार खड़ी करनी होगी। पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशन में इंदौर पुलिस कमिश्नरेट और इंटरनेशनल जस्टिस मिशन (आयजेएम) के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में “मानव तस्करी के बदलते रुझान: कानून प्रवर्तन की चुनौतियां एवं प्रतिक्रिया” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इस अपराध के बदलते वैश्विक स्वरूप और इसकी प्रभावी रोकथाम की रणनीतियों पर विस्तृत मंथन किया। सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त डीजीपी (एनडीआरएफ) डॉ. पी. एम. नायर उपस्थित थे। विशेष अतिथि के तौर पर पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह, पूर्व कुलपति प्रो. आशा शुक्ला, डीआईजी (महिला सुरक्षा) डॉ. किरणलता केरकेट्टा और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आर.के. सिंह ने शिरकत की। कार्यक्रम का संचालन एडिशनल डीसीपी सीमा अलावा ने किया। :: अपराध की जांच में विक्टिम सेंट्रिक एप्रोच जरूरी : डॉ. नायर मुख्य अतिथि डॉ. पी.एम. नायर ने जांच के सर्वोत्तम तरीकों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव तस्करी केवल एक राज्य की समस्या नहीं है, इसके लिए अंतरराज्यीय समन्वय और आधुनिक तकनीक का उपयोग अनिवार्य है। उन्होंने जोर दिया कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों को पीड़ित-केंद्रित (Victim-Centric) दृष्टिकोण अपनाना चाहिए ताकि पीड़ित को न्याय के साथ-साथ सम्मान भी मिल सके। :: समाज की भागीदारी से थमेगा अपराध : पुलिस कमिश्नर पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि इंदौर पुलिस सृजन और मोहल्ला मीटिंग जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से जन-जागरूकता फैला रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कानूनी प्रावधान काफी नहीं हैं, जब तक समाज इस अपराध के प्रति जागरूक नहीं होगा, तब तक इसे जड़ से खत्म करना मुश्किल है। तकनीकी दक्षता और त्वरित कार्रवाई इस लड़ाई के मुख्य हथियार हैं। :: वैश्विक और जमीनी हकीकत पर चर्चा :: प्रो. आशा शुक्ला ने मानव तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और इसके सामाजिक-आर्थिक कारणों का विश्लेषण प्रस्तुत किया। वहीं, मदद फाउंडेशन के संस्थापक राजेशमणि त्रिपाठी ने बचाव और पुनर्वास की प्रक्रियाओं में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को साझा किया। डीआईजी डॉ. किरणलता केरकेट्टा ने रेखांकित किया कि पीड़ितों पर पड़ने वाले मानसिक और सामाजिक प्रभावों को समझना बेहद जरूरी है, जिसमें एनजीओ की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। :: समन्वित प्रयास का लिया संकल्प :: कार्यशाला का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सभी एजेंसियां बेहतर समन्वय स्थापित कर मानव तस्करी के विरुद्ध एक मजबूत और संवेदनशील तंत्र विकसित करेंगी। कार्यक्रम में शहर के सभी डीसीपी, एडिशनल डीसीपी, महिला डेस्क प्रभारी और बाल कल्याण अधिकारियों सहित महिला एवं बाल विकास विभाग के पदाधिकारी मौजूद रहे। अंत में आभार एसीपी रुबीना मिजवानी ने माना। प्रकाश/02 अप्रैल 2026