राज्य
02-Apr-2026


:: श्रम स्टार रेटिंग में बाल श्रम मिला तो मिलेंगे शून्य अंक, जेल और भारी जुर्माने का भी प्रावधान :: इंदौर (ईएमएस)। मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश से बाल श्रम और बंधक श्रम को पूरी तरह जड़ से खत्म करने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। श्रम विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि 14 से 18 वर्ष तक के किशोरों का खतरनाक उद्योगों और प्रक्रियाओं में नियोजन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। खास बात यह है कि अब औद्योगिक संस्थानों को दी जाने वाली श्रम स्टार रेटिंग में बाल श्रम या बंधक श्रम पाए जाने पर संबंधित संस्थान को सीधे शून्य अंक दिए जाएंगे। श्रम विभाग ने सभी जिला श्रम अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे उन संस्थानों को रेटिंग के लिए प्रोत्साहित करें जहाँ बाल श्रमिक नहीं हैं, भले ही अन्य मापदंडों में वे थोड़े पीछे हों। इससे उद्योगों के बीच बाल श्रम मुक्त कार्यस्थल बनाने की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। :: वेदा पहल और हर शुक्रवार होगी समीक्षा :: प्रदेश में बाल श्रम के उन्मूलन के लिए वेदा पहल के अंतर्गत अब प्रत्येक शुक्रवार को नियमित समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें बच्चों की शिक्षा, पुनर्वास और सुरक्षा के साथ-साथ न्यायालयों में चल रहे अभियोजन मामलों की कड़ी निगरानी होगी। आमजन भी चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 (टोल-फ्री 24/7) पर ऐसी शिकायतों की जानकारी दे सकते हैं, जिनकी विभाग द्वारा विशेष मॉनिटरिंग की जा रही है। :: सजा और जुर्माने का सख्त प्रावधान :: बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत उल्लंघन करने पर 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना और 6 माह से 2 वर्ष तक की जेल हो सकती है। वहीं, बंधक श्रम पद्धति (उत्सादन) अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम 3 वर्ष का कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। :: पुनर्वास के लिए मिलेंगे 3 लाख रुपये तक :: केंद्र प्रवर्तित योजना 2021 के तहत बंधक श्रमिकों के पुनर्वास के लिए बड़ी आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई है: - वयस्क पुरुष बंधक श्रमिक : 1 लाख रुपये की सहायता। - महिलाएं एवं अनाथ बच्चे : 2 लाख रुपये की सहायता। - मानव तस्करी या शारीरिक शोषण के पीड़ित : 3 लाख रुपये तक की पुनर्वास सहायता। शासन ने प्रत्येक जिले में बंधक श्रमिकों की तत्काल मदद के लिए कार्पस फंड का गठन भी किया है, ताकि मुक्त कराए गए श्रमिकों को तत्काल राहत मिल सके। प्रकाश/02 अप्रैल 2026