राज्य
03-Apr-2026
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मुंबई, (ईएमएस)। ईरान-इजरायल युद्ध के बावजूद मुंबई का रियल एस्टेट सेक्टर मार्च २०२६ में मजबूत गति पकड़ गया है। रजिस्ट्रेशन में साल दर साल बढ़ोतरी हुई है और स्टैम्प ड्यूटी कलेक्शन में भी उछाल आया है, जो उच्च कीमत वाले घरों की बढ़ती मांग का संकेत है। नाइट फ्रैंक इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र के रजिस्ट्रेशन और स्टैम्प विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च २०२६ में मुंबई महानगर पालिका क्षेत्र में १५,५१६ से अधिक प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन हुए, जो पिछले १४ साल में मार्च महीने का सबसे बड़ा आंकड़ा है। फरवरी २०२६ में हुई वृद्धि ने इसका समर्थन किया था, जिसमें रजिस्ट्रेशन और स्टैम्प ड्यूटी कलेक्शन दोनों में साल दर साल वृद्धि देखी गई थी। जनवरी में आवासीय यूनिट्स (१५,७७१ यूनिट्स) के लॉन्च में साल दर साल ११% गिरावट देखी गई थी। मार्च २०२६ में मुंबई के रेजिडेंशियल मार्केट में रजिस्ट्रेशन के साथ उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। इस रजिस्ट्रेशन ने पिछले वर्ष के उच्च आधार को पार करते हुए एक दशक से अधिक समय में मार्च महीने का सबसे अच्छा प्रदर्शन दर्ज किया। यह वृद्धि शहर में अंतिम खरीदारों की मजबूत मांग और स्थिर आर्थिक स्थिति तथा खरीदारों के विश्वास को दर्शाती है। - मध्यम वर्ग की बढ़ती मांग से रियल एस्टेट मजबूत मध्यम वर्ग में यह वृद्धि अधिक देखी जा रही है, जहां घर खरीदने वाले लोग उचित कीमत में अच्छे क्वालिटी के घरों में अपग्रेड कर रहे हैं। स्टैम्प ड्यूटी कलेक्शन में उतार-चढ़ाव के बावजूद, अनुकूल आर्थिक और बुनियादी घटक और मुंबई का आकर्षण इस मांग को जारी रखने का समर्थन कर रहे हैं। नाइट फ्रैंक इंडिया के इंटरनेशनल पार्टनर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल कहते हैं कि यह प्रवृत्ति आने वाले समय में भी जारी रहने की उम्मीद है। - रजिस्ट्रेशन में वृद्धि और मिड-रेंज प्रॉपर्टी की हिस्सेदारी में इजाफा फरवरी २०२६ की तुलना में मार्च में रजिस्ट्रेशन में १९ प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, स्टैम्प ड्यूटी कलेक्शन महीने-दर-महीने आधार पर ३२ प्रतिशत बढ़कर १,४९२ करोड़ रुपये तक पहुंच गया। सालाना आधार पर प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन स्थिर रहा, जबकि मार्च २०२५ की तुलना में स्टैम्प ड्यूटी कलेक्शन में ६ प्रतिशत की गिरावट आई। यह फर्क मांग में कमी के बजाय लेन-देन की पद्धतियों में बदलाव के कारण है। विभाजन को करीब से देखने पर पता चलता है कि रुझान मध्यम आय वर्ग की ओर बढ़ रहा है। मार्च २०२६ में १ करोड़ से २ करोड़ रुपये के प्रॉपर्टी का कुल रजिस्ट्रेशन में ३८ प्रतिशत हिस्सा रहा, जो पिछले साल ३२ प्रतिशत था। वहीं, १ करोड़ रुपये से कम कीमत वाले घरों का हिस्सा ४६ प्रतिशत घटकर ३९ प्रतिशत रह गया। उच्च मूल्य वर्ग (२ करोड़ से ५ करोड़ रुपये और उससे ऊपर) स्थिर बना रहा। ‎संजय/संतोष झा-०३ अप्रैल/२०२६/ईएमएस