बीते कई सालों से चेन्नई की 16 सीटें डीएमके की गढ़ रही चेन्नई,(ईएमएस)। तमिलनाडु की राजनीति में एक नया तूफान उठ खड़ा हुआ है। सुपरस्टार थलापति विजय ने फरवरी 2024 में अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) लांच की और विधानसभा चुनावों में चेन्नई को अपने अभियान का केंद्र बनाया है। चेन्नई का हर जिला लंबे समय से डीएमके का गढ़ रहा है, और यहाँ की 16 सीटें सत्ताधारी दल के कब्जे में रही हैं। विजय ने अपनी राजनीतिक रणनीति में दो सीटों से चुनाव लड़ने का फैसला किया है, तिरुचिरापल्ली (पूर्व) और पेरम्बूर। जहां तिरुचिरापल्ली उनके लिए सुरक्षित विकल्प है, वहीं पेरम्बूर सीट का महत्व इसलिए है क्योंकि यह मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के कोलाथुर क्षेत्र से करीब है। पेरम्बूर से चुनाव लड़कर विजय सीधे डीएमके के मुखिया के सामने चुनौती पेश कर रहे हैं और खुद को उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में बता रहे हैं। विजय की रणनीति केवल व्यक्तिगत चुनौती तक सीमित नहीं है। चेन्नई में टीवीके के अन्य मजबूत उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में हैं। महासचिव एन आनंद टी नगर से, आधव अर्जुना विल्लिवक्कम से, उप-महासचिव के राजमोहन एग्मोर से और एआईएडीएमके के पूर्व विधायक बीएस बावू को कोलाथुर से उतारा गया है। बावू का मुकाबला सीधे मुख्यमंत्री स्टालिन से होगा। इन उम्मीदवारों के माध्यम से टीवीके चेन्नई के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी पहचान मजबूत करना चाहती है। चेन्नई पर विजय का फोकस डीएमके के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। डीएमके का यह गढ़ सालों से सुरक्षित माना जाता रहा है और एमजीआर या जयललिता जैसी दिग्गज हस्तियों ने भी चेन्नई में डीएमके को पूरी तरह से मात नहीं दी थी। एमजीआर ने तमिलनाडु में लगातार तीन चुनाव जीतकर राज्य में अपना दबदबा बनाया था, लेकिन चेन्नई में डीएमके पर पूर्ण नियंत्रण नहीं कर सके। जयललिता की लगातार दस साल की कोशिशों ने 2006 और 2011 में डीएमके के गढ़ को कुछ हद तक कमजोर किया था, लेकिन 2016 में डीएमके ने अपना दबदबा फिर से मजबूत किया और 2021 के विधानसभा चुनावों में डीएमके गठबंधन ने चेन्नई की सभी 16 सीटें जीत लीं। विजय का चेन्नई पर ध्यान सिर्फ़ डीएमके की सत्ता को चुनौती देने तक सीमित नहीं है। यह एआईएडीएमके को भी हाशिये पर करने की रणनीति है। एआईएडीएमके ने भाजपा के साथ गठबंधन किया है, वहीं डीएमके ने कांग्रेस को अपने साथ जोड़कर चुनावी तैयारी की है। विजय का उद्देश्य यह दिखाना है कि उनकी पार्टी केवल नए विकल्प के रूप में नहीं है, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में एक मुख्य विपक्षी दल के रूप में स्थापित हो सकती है। इसके लिए उन्होंने अपने प्रसिद्ध चेहरे और युवा समर्थकों को मैदान में उतारा है। पेरम्बूर सीट का चुनाव विजय के राजनीतिक उदय का प्रतीक है। यह विधानसभा क्षेत्र सीधे डीएमके के वर्तमान विधायक आरडी शेखर के इलाके से लगता है, और यहां से विजय का मुकाबला मुख्यमंत्री स्टालिन से होगा। यह सीट विजय को डीएमके के गढ़ में अपनी ताकत दिखाने और सीधे मुकाबला करने का अवसर देती है। यह रणनीति उन्हें तमिलनाडु में करिश्माई और प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित करने में मदद कर सकती है। सुपरस्टार से राजनीतिक नेता बनने की प्रक्रिया में विजय ने युवा मतदाताओं और विभिन्न समुदायों का ध्यान आकर्षित किया है। चेन्नई उत्तर न केवल टीवीके के लिए अपनी ताकत आज़माने का मैदान है, बल्कि यह पार्टी की व्यापक स्वीकार्यता और राजनीतिक उभर का प्रतीक भी बन सकता है। डीएमके और एआईएडीएमके दोनों के लिए यह चुनौती नई है, क्योंकि अब सत्ता विरोधी लहर के बजाय एक करिश्माई और सक्रिय नेता के खिलाफ सीधी लड़ाई हो रही है। इस चुनावी रणनीति से विजय ने साबित किया है कि वे केवल अभिनेता नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव लाने वाले खिलाड़ी भी हैं। इस तरह, टीवीके की चेन्नई में रणनीति और थलापथि विजय की लोकप्रियता आगामी विधानसभा चुनावों में डीएमके की बढ़त को चुनौती दे सकती है, और राज्य की राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह बदलने की संभावना रखती है। आशीष दुबे / 03 अप्रैल 2026