राष्ट्रीय
03-Apr-2026


नई दिल्ली,(ईएमएस)। ईरान और ओमान मिलकर होर्मुज जलडमरुमध्य को लेकर एक नया प्रोटोकॉल तैयार कर रहे हैं, इसका उद्देश्य इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित, सुरक्षित और सुव्यवस्थित करना है। यह जलडमरुमध्य दुनिया की तेल आपूर्ति का एक प्रमुख रास्ता है, इसलिए यहां होने वाले किसी भी बदलाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाता है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने बताया कि उनकी सरकार इस प्रोटोकॉल के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने में लगी हुई है। आंतरिक मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव पर ओमान के साथ औपचारिक चर्चा शुरू की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था का उद्देश्य जहाजों पर कोई प्रतिबंध लगाना नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित मार्ग और बेहतर सुविधाएं देना है। ईरान और ओमान मिलकर इस रूट पर टैंकर ट्रैफिक की निगरानी और समन्वय करने वाले है। हालांकि, गरीबाबादी ने कहा कि मौजूदा हालात “युद्ध जैसी परिस्थितियों” के हैं, इसलिए पहले के नियमों को पूरी तरह लागू करना संभव नहीं है। इस बयान से संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा चिंताएं इस नई नीति के पीछे एक बड़ा कारण हैं। ओमान ने अभी तक इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावना मजबूत मानी जा रही है। ईरान पहले भी कह चुका है कि वह पांच मित्र देशों के लिए जलडमरुमध्य को खोलने की योजना बना रहा है। इन पांच देशों में भारत, रूस, चीन, इराक और पाकिस्तान शामिल हैं। भारत के लिए यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसकी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से पूरा होता है। इसके में ईरान का यह भरोसा भारत के लिए राहत की खबर माना जा सकता है। दूसरी ओर, ईरान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका, इज़रायल और उनके सहयोगी यूरोपीय तथा खाड़ी देशों के जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ने की संभावना है और वैश्विक व्यापार पर भी असर पड़ सकता है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी हाल ही में कहा कि होर्मुज जलडमरुमध्य का भविष्य ईरान और ओमान मिलकर तय करने वाले है। यह बयान इस बात का संकेत है कि दोनों देश इस रणनीतिक क्षेत्र पर अपना नियंत्रण मजबूत करना चाहते हैं। इस बीच यूनाइटेड किंगडम ने 60 से अधिक देशों के साथ बैठक कर संकट का कूटनीतिक समाधान खोजने की कोशिश की है। कुल मिलाकर, होर्मुज जलडमरुमध्य को लेकर बन रहा यह नया प्रोटोकॉल न केवल क्षेत्रीय राजनीति, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है। आशीष दुबे / 03 अप्रैल 2026