03-Apr-2026


रोके गए देयक और वाद व्यय का भुगतान करने आदेश जबलपुर, (ईएमएस)। पश्चिम मध्य रेलवे के एक दिवंगत कर्मचारी की पत्नी को न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। दस्तावेजों में नाम अलग-अलग होने के कारण रेलवे प्रशासन ने जो सेवा निवृत्ति लाभ और अंतिम भुगतान रोका था, उसे अब जारी करने का रास्ता साफ हो गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवाह के बाद सरनेम बदलना सामान्य बात है और ऐसे मामलों में अलग-अलग नामों को एक ही व्यक्ति माना जाएगा। मामले के अनुसार जबलपुर मंडल में टेक्नीशियन-1 पद पर कार्यरत कर्मचारी का 15 जुलाई 2024 को निधन हो गया था। इसके बाद उनकी पत्नी ने अंतिम भुगतान और अन्य सेवा लाभों के लिए आवेदन किया। जांच के दौरान रेलवे प्रशासन ने पाया कि महिला के अलग-अलग दस्तावेजों में नाम में अंतर है। इसी आधार पर भुगतान रोक दिया गया और न्यायालय से घोषणा लाने को कहा गया। न्यायालय में सुनवाई के दौरान वादिनी की ओर से अधिवक्ता शिवम गुप्ता ने बताया कि नाम में अंतर विवाह के बाद सरनेम बदलने के कारण है। इसके समर्थन में शपथ पत्र और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। रेलवे की ओर से नामों की विसंगति और विवाह संबंधी दस्तावेजों की कमी का हवाला दिया गया। सभी पक्षों को सुनने के बाद तृतीय व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ खंड, जबलपुर रिशा अहमद कुरैशी की अदालत ने गत दिवस को फैसला सुनाया। अदालत ने महिला के सभी नामों को एक ही व्यक्ति का घोषित करते हुए उन्हें वैधानिक मान्यता दी और रेलवे प्रशासन को शेष भुगतान प्रक्रिया जल्द पूरी करने के आदेश दिए। साथ ही प्रकरण में हुए खर्च का वहन भी रेलवे प्रशासन को करने के निर्देश दिए गए। सुनील साहू / शहबाज / 03 अप्रैल 2026/ 5.16