मुंबई (ईएमएस)। मुख्यधारा सिनेमा में महिलाओं के नेतृत्व वाली कहानियां धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं। यह कहना है अभिनेत्री भूमि पेडनेकर का। अभिनेत्री का मानना है कि पहले की तुलना में अब ऐसी फिल्में कम बन रही हैं, जिनमें महिला किरदार कहानी के केंद्र में हों। उन्होंने इसे निराशाजनक बताते हुए कहा कि महिलाओं की कहानियां न सिर्फ मनोरंजन करती हैं, बल्कि समाज को नई दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनके अनुसार, इस तरह की फिल्मों का कम होना सिनेमा के विविधता और गहराई दोनों के लिए चिंता का विषय है। अपने करियर के शुरुआती दौर को याद करते हुए भूमि ने बताया कि उन्होंने हमेशा अलग और चुनौतीपूर्ण किरदारों को चुनने की कोशिश की है। उन्होंने वर्ष 2015 में दम लगा के हईशा से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी। इस फिल्म में उनके प्रदर्शन को काफी सराहा गया और इसके बाद उन्होंने लगातार ऐसी फिल्मों में काम किया, जो सामाजिक मुद्दों को सामने लाती हैं और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती हैं। भूमि पेडनेकर ने यह भी कहा कि भले ही बड़े पर्दे पर महिला प्रधान कहानियों की संख्या घट रही हो, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म इस कमी को काफी हद तक पूरा कर रहे हैं। उनके अनुसार, ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अभिनेत्रियों को ज्यादा सशक्त और विविध किरदार निभाने के अवसर मिल रहे हैं। यहां की कहानियां अधिक वास्तविक, साहसी और प्रयोगधर्मी होती हैं, जो कलाकारों को अपनी प्रतिभा का पूरा दायरा दिखाने का मौका देती हैं। उन्होंने आगे कहा कि महिलाएं हमेशा से ही अपने किरदारों के चयन में साहसिक रही हैं और वे ऐसे रोल्स को प्राथमिकता देती हैं, जो सिर्फ मनोरंजन तक सीमित न होकर समाज को कुछ नया सोचने के लिए प्रेरित करें। भूमि के मुताबिक, ओटीटी प्लेटफॉर्म इस तरह के प्रयोगों के लिए एक उपयुक्त मंच बनकर उभरे हैं, जहां कलाकार बिना किसी दबाव के अपने काम को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सकते हैं। अभिनेत्री का कहना है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स उन्हें न सिर्फ एक कलाकार के रूप में आगे बढ़ने का अवसर देते हैं, बल्कि उन्हें नई चुनौतियों का सामना करने के लिए भी प्रेरित करते हैं। सुदामा/ईएमएस 04 अप्रैल 2026