04-Apr-2026
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वॉशिंगटन(ईएमएस)। ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब एक अत्यंत विनाशकारी और घातक मोड़ पर पहुंच गया है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास तनाव उस समय अपने चरम पर पहुंच गया, जब शुक्रवार को ईरानी सेना ने अमेरिकी वायुसेना के एक और अत्याधुनिक विमान, ए-10 थंडरबोल्ट को सफलतापूर्वक निशाना बनाकर मार गिराया। इस घटना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए इसे स्पष्ट रूप से युद्ध की स्थिति घोषित करते हुए कहा ये तो युद्ध है सब चलता है। एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने कूटनीतिक बातचीत की संभावनाओं को नकारते हुए सीधे शब्दों में कहा कि अमेरिका अब युद्ध की स्थिति में है और इन घटनाओं का बातचीत पर कोई सकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, वहां बढ़ते हमलों ने दुनिया भर के ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और भय का माहौल पैदा कर दिया है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों, विशेषकर एलपीजी और कच्चे तेल के आयात के लिए इसी समुद्री मार्ग पर अत्यधिक निर्भर है। यदि यह संघर्ष और लंबा खिंचता है, तो इसके गंभीर आर्थिक परिणाम पूरी दुनिया को भुगतने पड़ सकते हैं। फिलहाल, दोनों देशों के बीच की यह सैन्य तनातनी किसी बड़े वैश्विक संकट की आहट देती प्रतीत हो रही है। एक सप्ताह के भीतर यह दूसरा बड़ा अवसर है जब ईरान ने अमेरिकी हवाई शक्ति को सीधी चुनौती दी है। इससे पहले ईरान ने एक एफ-15 फाइटर जेट को भी मार गिराने का दावा किया था, जिससे क्षेत्र में सैन्य संतुलन और कूटनीतिक स्थिरता पूरी तरह डगमगा गई है। यह घटनाक्रम उन दावों के विपरीत है जिसमें हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिकी हमलों के कारण ईरान की सैन्य क्षमताएं लगभग समाप्त हो चुकी हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया है कि विमान पर हमला होने के बाद पायलट ने असाधारण सूझबूझ का परिचय दिया। वह क्षतिग्रस्त विमान को किसी तरह कुवैती हवाई क्षेत्र तक ले जाने में सफल रहा और वहां विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से पहले सुरक्षित बाहर निकल गया। वर्तमान में पायलट सुरक्षित बताया जा रहा है। ईरानी सेना ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया माध्यमों से इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे अपनी संप्रभुता की रक्षा बताया है। सबसे गंभीर बात यह है कि यह हमला उस समय किया गया जब अमेरिकी सेना पहले से ही अपने लापता चालक दल के सदस्यों के लिए बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान चला रही थी। ईरान की आक्रामकता यहीं नहीं रुकी; बचाव कार्य में जुटे दो यूएच-60 ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टरों को भी निशाना बनाया गया। हालांकि, इन हेलीकॉप्टरों में सवार सदस्यों को मामूली चोटें आई हैं और वे सुरक्षित बताए जा रहे हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/04अप्रैल2026