04-Apr-2026
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गुना (ईएमएस)। जिले में लगातार सामने आ रही गौ हिंसा की घटनाओं और प्रशासन की कथित निष्क्रियता के खिलाफ शनिवार को गौसेवकों का आक्रोश खुलकर सामने आया। शहर के व्यस्त हनुमान चौराहे पर गौसेवकों ने चक्काजाम कर दिया, जिससे करीब एक घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा। सडक़ के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पिछले एक महीने में जिले में तीन अलग-अलग स्थानों पर गौवंश के कटे हुए शव और अंग मिलने की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन अब तक आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि 6 मार्च को इंडस्ट्रियल एरिया में गाय के बछड़े का कटा हुआ शव मिला था, इसके बाद लूसन के बगीचा क्षेत्र में गाय की गर्दन मिली और हाल ही में हनुमान जयंती के दिन सदर बाजार रपटा इलाके में गाय के कटे हुए कान मिलने की घटना सामने आई। इसके अलावा हनुमान टेकरी परिसर में झूला संचालकों द्वारा मांस पकाकर खाने का मामला भी सामने आया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। गौसेवकों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे कई बार कलेक्टर के नाम ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिलता है, कार्रवाई नहीं होती। उनका कहना था कि यदि प्रशासन सख्ती नहीं बरतेगा तो वे खुद कदम उठाने को मजबूर होंगे। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने और कड़ी सजा देने की मांग की। मौके पर तहसीलदार जीएस बैरवा और कैंट थाना प्रभारी अनूप भार्गव पुलिस बल के साथ पहुंचे और काफी देर तक समझाइश देकर प्रदर्शनकारियों को शांत कराया। इसके बाद चक्काजाम समाप्त हुआ और यातायात सामान्य हो सका। तहसीलदार जीएस बैरवा ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की मांगों को सुना गया है और उनके द्वारा दिए गए आवेदन को परीक्षण के लिए भेजा गया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कैंट थाना पुलिस द्वारा की जा रही है और जो भी वैधानिक कार्रवाई होगी, वह नियमानुसार की जाएगी। साथ ही इस संबंध में एसडीएम को भी पत्र भेजा जाएगा। घटना के बाद शहर में तनाव का माहौल बना हुआ है, वहीं प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है कि वह जल्द ठोस कार्रवाई कर स्थिति को नियंत्रित करे। हाल में ही बछड़े की गर्दन काटने की घटना के मामले में कैंट पुलिस ने तीन आरोपियों को दबोचा था। जिन्हें कोर्ट में ले जाने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में गौसेवकों ने थाने को घेर लिया और आरेापियों का पैदल जुलूस निकालने की मांग की। -सीताराम नाटानी