व्यापार
05-Apr-2026
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- तेल की कीमत, रुपये की स्थिति और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर भी रहेगी ‎निवेशकों की नजर मुंबई (ईएमएस)। पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट का दौर रहा, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। नए वित्त वर्ष की शुरुआत में यह सप्ताह बाजार की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। घरेलू आर्थिक संकेतों के साथ-साथ वैश्विक अनिश्चितताओं ने निवेशकों की सोच में असमंजस पैदा कर दिया है। इस हफ्ते कई ऐसे प्रमुख कारक हैं, जो बाजार की चाल पर निर्णायक असर डाल सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 6 से 8 अप्रैल तक होगी। इस बैठक में ब्याज दर, महंगाई और लिक्विडिटी जैसे अहम मुद्दों पर फैसला लिया जाएगा। निवेशकों की निगाह इस पर है कि आरबीआई महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच किस तरह की नीति अपनाता है। यदि ब्याज दर बढ़ाई जाती है, तो बैंकिंग और रियल एस्टेट सेक्टर पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, उदार नीति से उपभोक्ता खर्च और कॉर्पोरेट निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा रहा है। इसी बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारत जैसे आयातक देश के लिए दबाव बढ़ा दिया है। महंगे तेल का असर चालू खाता घाटे और महंगाई पर पड़ सकता है। इसके अलावा, कंपनियों की लागत बढ़ने और उपभोक्ताओं की जेब पर असर डालने से बाजार की नकारात्मक भावना को बढ़ावा मिल सकता है। पिछले सप्ताह रुपये का डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरना निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण बना। आरबीआई के हस्तक्षेप से थोड़ी स्थिरता आई, लेकिन मुद्रा की अस्थिरता विदेशी निवेश और आयात लागत को प्रभावित कर सकती है। विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारी बिकवाली भी बाजार पर दबाव बनाए रख रही है। यदि यह रुझान जारी रहा, तो तेजी की उम्मीदें कमजोर पड़ सकती हैं। इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार की दिशा आरबीआई की नीति, तेल की कीमत, रुपये की स्थिति और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को सतर्क रहना और इन संकेतकों पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि किसी भी बदलाव से बाजार में तेजी या गिरावट दोनों तेज़ी से देखने को मिल सकती है। सतीश मोरे/05‎अप्रेल ---