05-Apr-2026


पटना, (ईएमएस)। ​बिहार के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले और विकास की एबीसीडी से अनजान नेताओं का असली चेहरा जनता के सामने बेनकाब हो चुका है। तेजस्वी यादव को न तो बिहार से लगाव है और न ही यहाँ के विकास से कोई सरोकार। उनका एकमात्र उद्देश्य सत्ता की कुर्सी हथियाना और अपने परिवार के कुनबे को सुरक्षित करना है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक प्रेम रंजन पटेल ने प्रेस वक्तव्य में आगे कहा कि ​तेजस्वी यादव को राजनीति विरासत में मिली होगी, लेकिन उसके साथ उन्हें भ्रष्टाचार और घोटालों की वह कार्यसंस्कृति भी विरासत में हीं मिली है, जिसने बिहार को दशकों पीछे धकेल दिया। जिस उम्र में युवा अपने भविष्य के लिए संघर्ष करते हैं, उस उम्र में तेजस्वी यादव ने बेनामी संपत्तियों और घोटालों के रिकॉर्ड बनाए। उनके लिए राजनीति जनसेवा का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी तिजोरियां भरने का एक पारिवारिक व्यवसाय बन गया। ​बिहार के विकास की बात करना तेजस्वी यादव के लिए केवल एक चुनावी जुमला है। हकीकत यह है कि उन्हें बिहार की जमीनी समस्याओं, आर्थिक नीतियों और विकास के रोडमैप का रत्ती भर भी ज्ञान नहीं है। जो व्यक्ति विकास की बुनियादी समझ तक नहीं रखता, वह प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य का सपना देखने का ढोंग कर रहा है। जिसके पास न कोई नीति, न कोई स्पष्ट विज़न, न कोई ठोस योजना। केवल बयानबाजी और भ्रम फैलाकर राजनीति करना उनकी आदत बन चुकी है, लेकिन यह अब ज्यादा दिन नहीं चलने वाला है। ​बिहार की जनता ने देख लिया है कि तेजस्वी यादव की प्राथमिकता में बिहार की आम जनता नहीं, बल्कि केवल उनका अपना परिवार है। ए टू जेड का नारा सिर्फ परिवार का विकास रहा है। यही कारण है कि बिहार की जागरूक जनता ने उन्हें बार-बार नकारा है, और आगे आने वाले समय में भी उन्हें धूल चटाने के लिए तैयार बैठी है। ​जब नीयत में खोट और नीति में केवल अपना स्वार्थ हो, तो जनता का समर्थन कभी नहीं मिलता। वे किसी भी सार्वजनिक मंच पर विकास, नीतियों और बिहार के भविष्य पर खुली बहस करें। चुनौती है, अगर तेजस्वी यादव में ज़रा भी आत्मविश्वास है, तो किसी भी मंच पर, किसी भी सार्वजनिक स्थान पर बिहार के विकास और अपने शासनकाल और अपने परिवार के शासनकाल के काले अध्यायों पर सीधी बहस कर लें, सच और झूठ का फैसला बिहार की जनता खुद कर लेगी। ​बिहार की जनता अब जुमलों में नहीं आने वाली। तेजस्वी यादव को यह समझ लेना चाहिए कि विरासत में कुर्सी मिल सकती है, लेकिन जनता का विश्वास कमाने के लिए चरित्र और ईमानदारी की जरूरत होती है, जो उनके पास कोसों दूर तक नहीं है। संतोष झा-०५ अप्रैल/२०२६/ईएमएस