05-Apr-2026
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अमेरिका-ईरान युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर से मिला बड़ा सबक नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत ने अमेरिका-ईरान युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर से बहुत बड़ी सीख ली है। इन दोनों घटनाओं ने दिखाया कि लड़ाई के समय हथियारों की मौजूदगी और उनकी ताकत कितनी जरूरी होती है। इसी वजह से रक्षा मंत्रालय ने अब वायु सेना को और मजबूत करने का फैसला किया है। रक्षा मंत्रालय स्वदेशी 1000 किलो के हवाई बम खरीदने की तैयारी में जुट गया है। ये बम अमेरिका के एमके-84 बम जैसा ही होगा, जो 2000 पाउंड यानी करीब 907 किलो विस्फोटक ले जा सकते हैं। इसका मतलब है कि ये बम दुश्मन के बड़े-बड़े टारगेट को पूरी तरह बर्बाद कर सकते है। अब भारत खुद इन बमों को बनाएगा ताकि विदेश से खरीदने की जरूरत कम हो जाए और वायु सेना हमेशा तैयार रहे। रक्षा मंत्रालय ने इन स्वदेशी बमों की खरीद के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट यानी ईओसी जारी किया है। इसके तहत 600 इसतरह के 1000 किलो के हवाई बम बनाए और खरीदे जाएंगे। इनके साथ टेल यूनिट यानी पूंछ वाला हिस्सा और दूसरे जरूरी उपकरण भी शामिल रहने वाले है। यह पूरा प्रोजेक्ट बाय इंडियन कैटेगरी में चलेगा यानी सब कुछ भारत में ही तैयार होगा। इससे भारतीय कंपनियां आगे बढ़ेंगी और देश की रक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। ये नए हवाई बम खुद-ब-खुद टुकड़ों में बंटकर फैल जाएंगे। ये उच्च कैलिबर के हथियार हैं जो बहुत तेज विस्फोट पैदा करते हैं। दुश्मन के टारगेट पर भारी प्रभाव डालते हैं। ये बम रूसी और पश्चिमी दोनों तरह के विमानों पर लगाए जा सकते हैं, जो कि वायु सेना के पास हैं। अभी तक वायु सेना इसतहर के एमके-84 क्लास के बम विदेशी कंपनियों से खरीदती थी। अब स्वदेशी बम आने से वायु सेना को ज्यादा विश्वास होगा और लॉजिस्टिक्स आसान होगा। ये बम दुश्मन के बड़े ठिकानों, पुलों, रनवे या गोदामों को एक झटके में नष्ट कर सकते हैं। बात दें कि इस प्रोजेक्ट को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में छह प्रोटोटाइप बनाए जाएंगे, जिसमें लाइव वाले और इनर्ट यानी बिना विस्फोटक वाले दोनों तरह के बम शामिल रहने वाले है। इनके साथ टेल यूनिट और दूसरे उपकरण भी विकसित किए जाएंगे। इस चरण में सिंगल स्टेज कंपोजिट ट्रायल्स होगा और उसके बाद एयर स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स यानी एएसक्यूआर की जांच की जाएगी। पहले चरण में करीब 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल जरूरी है। दूसरे चरण में योग्य कंपनियों को कमर्शियल रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल यानी आरएफपी जारी किया जाएगा और कुल 600 बम खरीदे जाएंगे। यह खरीद बाय इंडियन-आईडीडीएम कैटेगरी में होगी जो डीएपी 2020 के हिसाब से सबसे ज्यादा स्वदेशी वाला रास्ता है। प्रोजेक्ट को पूरा होने में करीब ढाई साल का समय लगेगा। ईओआई जारी होने से लेकर कॉन्ट्रैक्ट साइन होने तक यह समय लगेगा। इसमें प्रोटोटाइप बनाना, यूजर ट्रायल्स करना, मूल्यांकन, कॉमर्शियल प्रोसे और अंत में कॉन्ट्रैक्ट फाइनल करना शामिल है। बात दें कि वायु सेना प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ा रही है, ताकि स्वदेशी विकास हो सके। आगे चलकर बड़े स्तर पर उत्पादन हो सके। ट्रायल्स भारत में ही आईएएफ यूनिट्स या तय जगहों पर होगा और तय आईएएफ विमान पर ही इनकी टेस्टिंग की जाएगी। इससे लॉजिस्टिक एंड्योरेंस यानी लंबे समय तक हथियारों की सप्लाई आसान होगी। ये स्वदेशी 1000 किलो के बम वायु सेना को भारी ताकत देने वाले है। अब वायु सेना को विदेशी बमों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। भारतीय निजी कंपनियां भी इसमें हिस्सा ले सकती हैं। विदेशी सहयोग की भी अनुमति है लेकिन शर्त यह है कि डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग ज्यादातर भारत में ही की जाएं। कंपनियों को वित्तीय और तकनीकी दोनों तरह से जांचा जाएगा। उनकी इंजीनियरिंग क्षमता, इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटीग्रेशन क्षमता, स्वदेशी सामग्री का प्रतिशत और जरूरी स्टैंडर्ड का पालन देखा जाएगा। आशीष दुबे / 05 अप्रैल 2026