-वैज्ञानिक बोले-ऐसी हलचलें भूगर्भीय गतिविधियों का संकेत, निगरानी बनाए रखना जरुरी नई दिल्ली,(ईएमएस)। रविवार तड़के हिंद महासागर में 4.2 तीव्रता का भूकंप आया, जिसने क्षेत्र में भूगर्भीय हलचल पैदा की। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक यह भूकंप समुद्र तल से करीब 90 किलोमीटर की गहराई पर आया। सुबह के समय आए इस भूकंप से किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। विशेषज्ञों ने इसे सामान्य और कम तीव्रता वाला भूकंप बताया है, जिसके कारण किसी बड़े खतरे की संभावना नहीं बनी। साथ ही, किसी भी प्रकार की सुनामी चेतावनी भी जारी नहीं की गई है। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र के अंदर होने वाली ऐसी हलचलें भूगर्भीय गतिविधियों का संकेत होती हैं, जिन पर लगातार निगरानी बनाए रखना जरुरी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भूकंप केवल सतह पर ही नहीं, बल्कि पृथ्वी के अंदर कई गहराइयों पर भी उत्पन्न होते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भूकंपों को उनकी गहराई के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा जाता है। उथले भूकंप सतह से 70 किलोमीटर तक की गहराई में आते हैं, मध्यवर्ती भूकंप 70 से 300 किलोमीटर के बीच और गहरे भूकंप 300 से 700 किलोमीटर तक की गहराई में उत्पन्न होते हैं। वर्तमान भूकंप मध्यवर्ती श्रेणी में आता है, जो अपेक्षाकृत कम विनाशकारी होता है। हिंद महासागर का क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टि से अत्यंत सक्रिय है। यहां कई टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियां लगातार चलती रहती हैं, जिसके कारण समय-समय पर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। यह क्षेत्र पृथ्वी की आंतरिक संरचना में हो रहे परिवर्तनों का एक अहम संकेतक भी है, जो वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का विषय बना रहता है। इस क्षेत्र का इतिहास एक भयावह त्रासदी का गवाह भी रहा। 2004 में समुद्र के अंदर आए एक अत्यंत शक्तिशाली भूकंप ने व्यापक तबाही मचाई थी। उस समय उत्पन्न हुई विशाल सुनामी ने कई देशों के तटीय क्षेत्रों को प्रभावित किया और लाखों लोगों की जान चली गई। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि समुद्र के अंदर होने वाली हलचलें कभी-कभी अत्यंत विनाशकारी रूप भी ले सकती हैं। वर्तमान भूकंप भले ही मामूली हो, लेकिन यह प्राकृतिक घटनाओं के प्रति सतर्क रहने की जरुरत को रेखांकित करता है। वैज्ञानिक संस्थाएं लगातार इन गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी संभावित खतरे की स्थिति में समय रहते चेतावनी दी जा सके। इस प्रकार की निगरानी भविष्य में बड़े जोखिमों को कम करने में सहायक साबित होती है। भूकंप जैसी प्राकृतिक घटनाएं हमें यह सिखाती हैं कि प्रकृति के संतुलन को समझना और उसके अनुरूप तैयारी करना कितना अहम है। छोटे झटके अक्सर बड़े परिवर्तनों के संकेत हो सकते हैं, इसलिए इनके अध्ययन और विश्लेषण को गंभीरता से लेना जरुरी है। यही समझ हमें सुरक्षित और सजग समाज की ओर अग्रसर करती है। सिराज/ईएमएस 05अप्रैल26