क्षेत्रीय
06-Apr-2026
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जबलपुर, (ईएमएस)। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शताब्दी वर्ष पूर्ण होने अवसर पर सद्भावना समिति दीनदयाल नगर के तत्वावधान में समाज में समरसता, एकात्मता और परस्पर सहयोग की भावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सामाजिक सद्भाव बैठक का आयोजन लाल बहादुर शास्त्री विद्यालय त्रिमूर्ति नगर में किया गया. बैठक का संचालन दीनदयाल नगर कार्यवाह आलोक अग्निहोत्री ने किया, अतिथियों का स्वागत अतुल श्रीवास्तव पवन गुप्ता व दुलीचंद कोष्टा ने तिलक लगाकर श्रीफल और श्री राम नाम वस्त्र/पट्टा भेंट कर किया। कार्यक्रम का प्रारंभ मुख्य वक्ता भीष्म सिंह राजपूत क्रीड़ा भारती के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य, नगर संघ चालक कन्हैया लाल गुप्ता एवं मुकेश कुमार सेन क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट संचालक नशा मुक्ति, मनोआरोग्य, दिव्यांग पुर्नवास केंद्र के मुख्य आतिथ्य में भारत माता के चित्र में माल्यार्पण किया गया उसके पश्चात मनीष द्वारा एकल गीत राष्ट्र की जय चेतना का गान वंदे मातरम, राष्ट्रभक्ति प्रेरणा का गान वंदे मातरम के साथ हुआ. कार्यक्रम में विभिन्न जाति और वर्ग के लोगों ने भागीदारी की। बैठक की शुरुआत भारत माता के तेलचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुई, जिसके बाद सामाजिक समरसता और आपसी एकता पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक में समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद, सहयोग और सामाजिक एकता और स्वास्थ्य को सशक्त बनाने के विषयों पर प्रबुद्ध और वरिष्ठजनों द्वारा विचार रखे गए. मुख्य अतिथि मुकेश कुमार सेन क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट ने समाज को सशक्त, समृद्ध, स्वस्थ और समरसता पूर्ण बनाने के विषय में अपने विचार रखे समाज में पाश्चात्य सभ्यता और भौतिकवाद के अंधानुकरण के कारण युवाओं में मादक द्रव्यों का नशा और मानसिक रोग जैसी विकराल समस्या समाज के लिए गंभीर विषय बन चुका है जिससे समाज में अपराध, अराजकता और गंभीर शारीरिक और मानसिक बीमारीयों ने जन्म ले लिया है और इसका प्रमुख कारण है देश के युवाओं का भारतीय सनातन संस्कृति के मूल आधार आध्यात्मिकता से दूर जाना और यदि हमारे राष्ट्र की युवा पीढ़ी पथभ्रष्ट हो रही है तो किस प्रकार हमें उनके अंदर भक्ति, ज्ञान और सतकर्म के साथ स्वयं सहित, परिवार, समाज, राष्ट्र और मानवजाति के प्रति जिम्मेदार बनाने का प्रयास किया जाए, महर्षि वेदव्यास जी के वाक्य परोपकाराय पुण्याय पापाय परपीडनम् अर्थात दूसरों की भलाई (परोपकार) करना पुण्य है, और दूसरों को दुःख (पीड़ा) पहुँचाना पाप है। यह श्लोक भारतीय संस्कृति में परोपकार और अहिंसा के महत्व को दर्शाता है। भारतीय संस्कृति और भारतीय दर्शन का अनुकरण करना चाहिए, वहीं मुख्य वक्ता भीष्म सिंह राजपूत ने अपने उद्बोधन में बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ध्येयः पंच-परिवर्तन से राष्ट्रीय पुनर्निर्माण में समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता आवश्यक है. पंच परिवर्तन के पांच आयाम कुटुंब प्रबोधन (पारिवारिक मूल्य), सामाजिक समरसता (जाति-भेद मिटाना), पर्यावरण संरक्षण (पानी, पेड़, प्लास्टिक मुक्त), नागरिक कर्तव्य (अनुशासन), और स्वदेशी जीवन शैली (भाषा, भोजन, भेष) जिसे अपनाकर एक सुखी, स्वस्थ, शिक्षित, समृद्ध समाज की पुर्नस्थापना की जा सकती है. मातृशक्ति कि ओर प्रसिद्ध कवियित्री श्रीमती संध्या जैन ने कहा कि मोबाइल और सोशल मीडिया के दुरूपयोग के विषय में भी विचार किया जाए साथ ही सामाजिक भाईचारे और सहयोग की भावना को सशक्त करने पर बल देने की आवश्यकता पर बल दिया। अंत में सभी ने सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में ज्ञानार्जन पांडेय उपेन्द्र शर्मा डा मुकेश पाण्डेय आर्यन पाडेय रोहिणी विश्वकर्मा संजय उपाध्याय प्रताप प्रजापति, गजेंद्र कोष्टि, डेनी बुंदेला विमल नामदेव मुकेश कोष्टा संजीव उपाध्याय संतोष पटेल राकेश यादव छत्रपाल शुक्ला जगदीश सोनी सहित सभी सामजिक प्रमुख व पदाधिकारी उपस्थित रहे। - सुनील साहू / मोनिका / 06 अप्रैल 2026/ 06.13