:: इंदौर के 26 केंद्रों पर मुफ्त रेबीज टीकाकरण, क्यूआर कोड से मिलेगी अस्पताल की लोकेशन :: इंदौर (ईएमएस)। रेबीज एक जानलेवा विषाणु जनित संक्रमण है, लेकिन समय पर इलाज मिले तो इससे 100% बचाव संभव है। इंदौर स्वास्थ्य विभाग ने जिले के नागरिकों को रेबीज से सुरक्षा प्रदान करने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक कुल 26 शासकीय केंद्रों पर एंटी-रेबीज वैक्सीन की सुविधा सुलभ कराई गई है। आमजन की सुविधा के लिए विभाग ने प्रमुख सार्वजनिक स्थलों जैसे सरवटे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, इंदौर चिड़ियाघर और एयरपोर्ट पर विशेष सूचना बोर्ड लगाए हैं। इन बोर्डों पर अंकित क्यूआर कोड को स्कैन करते ही नागरिकों के मोबाइल पर 26 सक्रिय शासकीय अस्पतालों की सूची और उनकी लोकेशन प्रदर्शित होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में देपालपुर, बेटमा, मानपुर, महू, सांवेर और हातोद के अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है। :: घरेलू नुस्खे पड़ सकते हैं भारी :: स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जानवर के काटने या खरोंचने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से धोना चाहिए। घाव पर मिर्च, सरसों का तेल या अन्य पदार्थ लगाना संक्रमण को बढ़ा सकता है और बेहद खतरनाक हो सकता है। अंधविश्वास और घरेलू उपचार के कारण अक्सर मरीज अस्पताल देरी से पहुँचते हैं, जो अंततः जानलेवा साबित होता है। :: केटेगरी-3 बाइट का विशेष उपचार :: गंभीर घाव होने पर (जिसे मेडिकल भाषा में केटेगरी-3 बाइट कहा जाता है) केवल वैक्सीन पर्याप्त नहीं होती। ऐसे मामलों में रेबीज वैक्सीन के साथ रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन इंजेक्शन लगाया जाता है। वर्तमान में यह जीवन रक्षक सुविधा इंदौर के शासकीय हुकुमचंद अस्पताल (लाल अस्पताल) में निःशुल्क उपलब्ध है। :: ये सावधानियां रखें :: तुरंत सफाई : घाव को तत्काल साबुन और पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोएं। एंटीसेप्टिक : सफाई के बाद घाव पर स्प्रिट या घरेलू एंटीसेप्टिक का उपयोग करें। पूरा कोर्स : चिकित्सक के परामर्श अनुसार टीकाकरण का कोर्स अधूरा न छोड़ें। पेट्स का ध्यान : अपने पालतू जानवरों का समय-समय पर टीकाकरण अवश्य कराएं। रेबीज एक घातक बीमारी है, एक बार लक्षण उभरने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है। लेकिन समय पर और पूरा टीकाकरण कराने से इस बीमारी से शत-प्रतिशत बचाव संभव है। स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि बीमारी से डरने के बजाय तथ्यों के प्रति जागरूक बनें। प्रकाश/06 अप्रैल 2026