- सरकार को करीब 17,000 करोड़ से 18,000 करोड़ रुपये का प्रावधान करना होगा नई दिल्ली (ईएमएस)। केंद्र सरकार ने कहा है कि वह पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित कारोबारियों विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए 2.5 लाख करोड़ रुपये की ऋण गारंटी योजना लाने के बारे में सोच रही है। इस योजना ने कारोबारियों को राहत मिल सकती है। सूत्रों के मुताबिक इस योजना के तहत अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण उधारकर्ताओं द्वारा ऋण चुकाने में चूक होने की स्थिति में उधारदाताओं को 100 करोड़ रुपये तक के ऋणों पर करीब 90 प्रतिशत की ऋण गारंटी प्रदान की जाएगी। बैंक ऋण पर यह गारंटी नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (एनसीजीटीसी) देगी जो सरकार की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी है। इस योजना के लिए सरकार को करीब 17,000 करोड़ से 18,000 करोड़ रुपये का प्रावधान करना होगा। ऐसी ही योजना कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान भी लागू की गई थी, जो काफी सफल रही और विभिन्न क्षेत्रों के कई कारोबारों को काम जारी रखने एवं बकाया चुकाने में मदद मिली। सरकार ने मई 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत आपात ऋण गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) शुरू की थी। इसका उद्देश्य कोविड-19 वैश्विक महामारी से उत्पन्न व्यवधान के बीच पात्र एमएसएमई और अन्य कारोबारी इकाइयों को परिचालन देनदारियां पूरी करने और कारोबार फिर से शुरू करने में मदद देना था। इस योजना के तहत अर्थव्यवस्था के करीब सभी क्षेत्रों को शामिल किया गया था और पात्र उधारकर्ताओं को दिए गए ऋण पर सदस्य ऋणदाता संस्थानों को 100 प्रतिशत गारंटी प्रदान की गई थी। योजना की संरचना ऐसी थी कि उधारकर्ताओं को ऋण आसानी से मिल सके। ऋणदाता संस्थान उधारकर्ता के मौजूदा ऋण के आधार पर पूर्व-स्वीकृत ऋण देते थे और अतिरिक्त ऋण के लिए नया मूल्यांकन नहीं किया जाता था।इसके अलावा ऋण पर ब्याज दर की अधिकतम सीमा तय की गई थी ताकि कर्ज की लागत कम रहे एवं ऋण बिना ‘प्रोसेसिंग’ (प्रक्रिया) शुल्क, पूर्व भुगतान शुल्क और गारंटी शुल्क के दिए जाते थे। यह योजना 31 मार्च 2023 तक लागू रही। इस बीच सरकार ने आम लोगों की कठिनाइयों को कम करने के लिए हाल में कई कदम भी उठाए हैं जिनमें पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती शामिल है।भारत ने पेट्रोल एवं डीजल पर उत्पाद शुल्क घटाया है। साथ ही महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात पर छूट दी है। विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) इकाइयों को घरेलू शुल्क क्षेत्र में संचालन की अनुमति भी दी गई है। असरकार ने 26 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क 10 रुपये प्रति लीटर घटाया था ताकि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के असर से उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। सतीश मोरे/07अप्रेल ---